अमृतसरकपूरथला / फगवाड़ागुरदासपुरचंडीगढ़जालंधरपंजाबपटियालाराष्ट्रीयलुधियानाहोशियारपुर

जालंधर में SIR आज से, घर-घर आएंगे BLO:रेलवे के खंडहर क्वार्टर भी मैपिंग में, नहीं मिल रहे 350 वोटर; महिलाएं डर-डरकर जा रहीं

जालंधर में आज (25 जून) से बीएलओ घर-घर जाकर वोटरों की मैपिंग शुरू करेंगे। इस दौरान उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मतदाताओं का सत्यापन करना होगा, जिनका वर्तमान में कोई अता-पता नहीं है। ऐसे मामलों में रेलवे के 40 क्वार्टर भी शामिल हैं, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से खंडहर बने हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन क्वार्टरों से जुड़े करीब 350 वोट अभी भी जालंधर की मतदाता सूची में दर्ज हैं।बीएलओ के लिए उन मतदाताओं की पहचान करना चुनौती बन गया है, जिनका कोई स्पष्ट पता नहीं मिल रहा है। विभाग ने सबसे अधिक मैपिंग करने वाले बीएलओ को सम्मानित करने की योजना भी बनाई है, लेकिन कई अधिकारी तय लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं।बीएलओ का कहना है कि 2003 और उससे पहले की वोटर लिस्ट में रेलवे के खंडहर क्वार्टरों में रहने वाले कई मतदाता दर्ज हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश लोग या तो रिटायर हो चुके हैं या स्थान छोड़ चुके हैं। दशकों से खाली पड़े ये क्वार्टर अब पूरी तरह खंडहर में बदल चुके हैं, जिससे मतदाताओं की मैपिंग लगभग असंभव हो रही है।

खंडहर बन चुके रेलवे क्वार्टरों में फंसी वोटर लिस्ट:-

  • दिन में भी यहां आने में डर लगता है : मैपिंग में लगी एक महिला कर्मचारी ने बताया कि ये क्वार्टर अब नशेड़ियों का अड्डा बन चुके हैं। यहां घनी झाड़ियां उग आई हैं, रास्ते तक साफ दिखाई नहीं देते और सांप व अन्य जंगली जानवरों का डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि दिन में भी यहां आने में डर लगता है, इसलिए टीम को मजबूरी में परिवार के सदस्यों के साथ आना पड़ता है। स्थानीय कर्मचारियों ने बताया कि इन क्वार्टरों पर न तो नेम प्लेट हैं और न ही कोई संपर्क जानकारी, जिससे पुराने मतदाताओं का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है। इस संबंध में रेलवे विभाग को पत्र भेजकर सहायता की मांग की गई है।
  • दशकों से खंडहर क्वार्टरों में करीब 350 वोटर्स: वोटर्स की मैपिंग में लगे स्टाफ ने कहा कि उनको रेलवे क्वार्टरों में भी वोटों की मैपिंग की लिस्ट सौंपी गई है। लगभग 350 वोटर्स का मिलान करना उनकी जिम्मेदारी है। जब वह क्वार्टरों में गए तो हैरान रह गए। यहां पर न तो किसी घर के बाहर एड्रेस की प्लेट दिख रही है और न क्वार्टर का नंबर। दशकों से खाली पड़े क्वार्टरों की ईंटें तक निकल आई हैं। दरवाजों पर लिखे नंबर मिट चुके हैं। रेलवे विभाग से भी यहां रहने वाले लोगों के पते मांगे गए, लेकिन उनको भी ये पते नहीं मिल रहे। इस पर डिपार्टमेंट को लेकर लिखा गया है ताकि पैंशनर रिकॉर्ड से इनका पता निकाला जा सके।
  • विदेश गए लोगों के घर भी बंद, खटखटाकर वासप आ रहे BLO: दोआबा जोन में आते जालंधर में बड़ी संख्या में लोग विदेश में हैं। जालंधर के ही लोडोवाली रोड पर 50 से ज्यादा ऐसे घर हैं जो सालों साल से बंद हैं। बीएलओ को कहना है कि यहां वोटर मैप करने का टारगेट सबसे पीछे चल रहा है, कारण है कि घरों में लोग ही नहीं है। इनके मोबाइल नंबर भी नहीं हैं। ये भी पता नहीं कि इन घरों में से कितने लोगों ने विदेश में नागरिकता ले ली है या नहीं। बहुत से घर ऐसे हैं, जिनके बारे में आसपड़ोस के लोगों को भी जानकारी नहीं है। वह जा रहे हैं और दरवाजा खटखटाकर इनको संदिग्ध वोटर्स की लिस्ट में शामिल कर रहे हैं।

गांव के मुकाबले शहरों में SIR में आ रही मुश्किल

इलेक्शन तहसीलदार सुखदेव सिंह का कहना है कि गांवों के मुकाबले शहर प्री SIR में पीछे रहे हैं। इसका साफ कारण ये है कि शहर में बहुत से घर ऐसे हैं, जिनके दरवाजे सालों से बंद हैं। गांव में तो सरपंच को आसपड़ोस के लोगों की पूरी जानकारी रहती है। ऐसे में टीम उनके सहयोग से वोट मैप कर लेती है, लेकिन शहर में ऐसा कर पाना संभव नहीं है। यहां आस-पड़ोस वाले भी एक-दूसरे को नहीं जानते, जिससे यहां SIR में 100 फीसदी मैपिंग हो पना मुश्किल है। ऐसे वोटर्स को अब संदिग्ध की सूची में डाला जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page