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मकसूदां नई सब्जी मंडी आढ़तियों के शैल्टर से ही बन रही गैंगस्टर मंडी – जिम्मेदार कौन ?

एस.एस

मकसूदा नई सब्जी मंडी जालंधर आढ़तियो के शैल्टर से ही  गैंगस्टर मंडी बन रही है व मंडी में असंख्य स्वयंभू प्रधान ऐसे काबिज है जिनके खुद के पास डबल ट्रिपल सरकारी कारोबारी ऑक्शन फड़ है व वह फड़ो का किराये के रूप में लाखों रूपये महीना सरकारी जगह का खा रहे है व  अधिकांश ऐसे भी आढ़ती है जिनके पास डबल फड़ होने के बावजूद उनका पेट न भर रहा व वह उन कारोबारियों के लिए सिरदर्द बने बैठे है जिनके पास लाईसैंस तो है लेकिन कारोबार करने के लिए ऑक्शन फड़ नही है। इसी के चलते मंडी में नवनिर्मित फड़ो पर कारोबार करने हेतु ऐसे लाईसैंसी आढ़तियो से मार्किट कमेटी ने आवेदन मांगे है जिनके पास फड़ नही है।

महानगर का प्रसिद्ध कारोबारी स्थल रोजाना करोड़ो का कारोबार करने बाली मकसूदां स्थित नई सब्जी मंडी अब गैंगस्टरों की शैल्टर स्थली भी बन चुकी है। सब्जी व फलो की मंडी में अब नशे से लेकर देहव्यापार तक के कार्य भी सरेआम चलते है वही मंडी में अज्ञात शक्तियां अवैध कब्जे कर सरकारी कारोबारी ऑक्शन फड़ो के ऊपर व कुछ आढ़ती वर्ग की दुकानो के आगे विभिन्न प्रकार के खोखे स्थापित कर उन्हे आगे किराये पर सबलैट कर अवैध धंधा कर रही है वही कुछ शक्तिया मंडी में स्थापित रिटेल मार्किट पर धक्केशाही करते हुए रिटेल फड़ियो से तिगुणे रेट लेकर अपनी जेबे गर्म करने के साथ साथ अपना वर्चस्व भी कायम कर रही है। कुछ ऐसी ही शक्तियो के मार्गदर्शक बने आढ़तियो ने इन्हे अपनी फर्मो के किरायनामे देकर इन्हे लाईसैंसी आढ़ती का रूप देकर मंडी के आढ़तियो कै बराबर बिठा दिया है। मंडी में कारोबार व्यापार करना अच्छी सोच है लेकिन कारोबार के नाम पर अवैध कब्जे व शांत माहौल को खराब करना मंडी के विकास में रूकाबटे डालना गल्त कार्य है।

वर्णनीय है कि राज्यभर में स्थापित सब्जी फल व अनाज मंडियों में होलसेल कारोबारी बनने के लिए पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा प्रमाणित लाईसैंस प्राप्त करना लाज़मी है लेकिन प्रमाणित लाईसैंस प्राप्त करने के लिए पंजाब मंडी बोर्ड के नियमों के अंतर्गत मंडी में कारोबारी की दुकान की रजिस्ट्री या दुकान का किरायानामा,बिजली बिल की कोपी जैसे दस्तावेज विभाग में जमा करबाने अनिवार्य होते है।

नई सब्जी मंडी में विभागी सूची अनुसार इस वक्त लगभग 375 के करीब लाईसैंस जारी हो चुके है जबकि मंडी में दुकानो व बूथो की गिनती इससे काफी कम है। फ्री में बिन जगह दिए किराया खाने के इच्छुक कुछ आढ़तियो की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है क्योकि मंडी में कूछ ऐसे कारोबारी भी दाखिल हो रहे है जिनका मंडी कारोबार से कोई संबध नही है व वह मंडी में तेजी से बढ़ रहे प्रापर्ट्री रेटों पर अपना सिस्टम संचालित कर रहे है। मंडी में इनवैस्ट करने से जितनी इन्कम उन्हे प्रतिमाह होनी थी उतनी इन्कम वह अपनी दुकानो के किरायेनामे लिखित में देकर उतनी कमाई विन इनवैस्टमंट कर रहे है। कुछ ऐसे ही कारोबारियों सदका मंडी में गैंगस्टर कल्चर फलफूल रहा है व वह अपने किरायेनामे देकर बाहरी शक्तियो को लाईसैंसी कारोबारी बना कर मंडी के आढ़तियों पर अपना वर्चस्व कायम कर रहे है व मंडी के आढ़ती भी इनकी शक्तियों के कारण इनके समक्ष खामोश रहने में ही अपनी भलाई समझते है।

मॉडर्न मंडी के सपने लेते लेते आढ़तियो ने खुद रख दिया गैगस्टर मंडी के निर्माण का नींव पत्थर…

: आढ़ती समूह में व्यापारिक एकजूटता की कमी के चलते महानगर की प्रसिद्ध मकसूदां स्थित नई सब्जी मंडी मॉडर्न मंडी न बनते हुए गैंगस्टर मंडी के रूप में तेजी से विख्यात हो रही है। जिसमे रात्रि में मंडी के ही कारोबारी मंडी में बढ़ रही लूटपाट की वारदातों कारण आढ़ती भी जाने से परहेज करते है। वर्णनीय है कि मॉडर्न मंडी के सपने लेते लेते गैगस्टर मंडी का निर्माण का नींव पत्थर भी कुछ आढ़तियो ने खुद ही रखा है व अब वही शक्तियां आढ़ती वर्ग पर भारी पड़नी शुरू हो रही है। मंडी में परस्पर कारोबारी झगड़े पहले वरिष्ठ आढ़ती मिलबैठ कर निपटा देते थे लेकिन वही जिम्मेदारी अब कुछ प्रतिष्ठित आढ़ती बाहरी शक्तियों के दम पर निभा रहे है व मंडी में छोटी से छोटी समस्या के दौरान नीले बाणे बाले तक बुला लिए जाते है जो आकर मंडी में अपनी शक्ति से मंडी के ही आढ़तियो में खौफ पैदा कर जाते है। मंडी में 60 फीसदी आढ़ती ऐसे है जिनको मंडी से माल लेकर जाने बाले रिटेलरो से पेम॔ट नही मिल पा रही व उन्होने ऐसे कुछ रिटेलरो को माल देना बंद कर रखा है लेकिन ऐसे कुछ डिफाल्टरो भी कुछ प्रतिष्ठित आढ़तियो के शैल्टर तले अपने कारोबार को अंजाम दे रहे है व आढ़ती वर्ग अपनी पेमंट के लिए तरले मार रहे है। मंडी के इर्द गिर्द बसे ईलाको में बसे कुछ नशेड़ी युवा भी अब आढ़तियो की कमजोरियों को कैश करने लगे है व वह अवैध हथियारो साथ मंडी में सरेआम लूट की वारदातो को अंजाम देकर निकल जाते है। आढ़ती भी अब परस्पर फैसले के लिए इन्ही गैंगस्टर कल्चर फैलाने बाले कारोबारियों का सहारा लेते है। मंडी में प्रधानगी की होड़ में शामिल आढ़तियो को मंडी के विकास व समस्या से कोई लेना देना नही है वह आढ़तियो की सुविधा व उनकी समस्या की तरफ ध्यान केन्द्रित करने की जगह बाहरी शक्तियो के सहारे अपनी शक्तिया बढ़ाने में अत्यधिक व्यस्त रहते है व किसी भी तरह की शिकायत आने पर पूरी गाज मंडी के सफाई व पार्किंग ठेकेदारो सहित विभाग पर गिरानी शुरू कर देते है। आढ़ती समूह को चाहिए कि वह दूसरे पर अंगुली उठाने की जगह पहले खुद को सैट करे। सरकारी ऑक्शन फड़ो के किराये खाने बंद करबाए व जिन आढ़तियो पास दुकाने है उनको कारोबार हेतु फड़ की व्यवस्था पूर्ण करबाए। रिटेलरो से रोजाना वसूली कर होलसेल फड़ो पर बिठाने बाले आढ़तियो से फड़ो की नाजायज वसूली बंद करबाए व सभी रिटेलरो को पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा स्थापित रिटेल मार्किट में खुद शिफ्ट करबाए।फडो की सफाई हेतु अपने डस्टबिन रखें। किराये नामे की जगह कारोबार के इच्छूक पर्सन को अपनी फर्म के बैनर तले कारोबार करने का अवसर प्रदान करे जिससे मंडी में आढ़तियो की इन्कम में ज्यादा इजाफा होगा व मंडी में पेमंट डूबने के चांस भी कम होंगे वही आढ़ती की खुद की भी मार्किट ईमेज में सम्मानिय होगी।

रिटेल फड़ियों को रिटेल मार्किट में शिफ्ट नही होने दे रहे किराया खाने बाले कुछ आढ़ती…

 पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा राज्य भर की मंडियों में होलसेल व रिटेल कारोबार को अलग अलग जगह देकर बसाया गया है लेकिन नई सब्जी मंडी में सरकारी ऑक्शन फड़ो को अपनी पर्सनल जागीर समझने बाले कुछ आढ़ती अपनी कारोबारी फड़ो पर रिटेलरों को बिठा उनसे अडडे लगबाने के एवज में खुद वसूली करते है व जब विभाग द्वारा होलसेल फड़ो पर बैठे रिटेलरो पर कार्रवाई की जाती है तो वह लीडरी करते हुए विभागी अधिकारियों व कर्मचारियों को दागदार करना शुरू कर देते है। आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान शंटी बत्रा ने विभागी अपील पर सभी आढ़तियों को अपील की थी कि वह होलसेल फड़ो पर रिटेलरो को न बिठाए लेकिन वही कुछ आढ़तियो का हर बार यही कहना होता है कि जो रिटेलर उनकी फड़ो पर अडडे लगाते है उन पर उनकी काफी लगी हुई है जबकि हकीकतन उनकी सरकारी जमीन की फ्री की मंथली कमाई बंद होती है।विभागी अधिकारियो अनुसार जब भी मार्किट कमेटी कर्मचारी होलसेल फड़ो पर बैठे रिटेलरो का माल उठाते है तो आढ़ती खुद उन्हे छुड़ाने आ जाते है। वर्णनीय है कि मंडी के कुछ आढ़ती ही नही चाहते कि मंडी का विकास हो व मंडी के हालात दुरूस्त हो व उनकी कमाई के रास्ते बंद न हों।

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