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Afghanistan Crisis:अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों एयरलिफ्ट करने पहुंचा वायुसेना का स्पेशल विमान

अफगानिस्तान में तालिबान का राज कायम होने के बाद वहां फंसे भारतीयों को बचाने के लिए वायुसेना सेना का विमान काबुल पहुंच चुका है। भारत के करीब 500 अधिकारी और संबंधित सुरक्षा कर्मचारी वहां फंसे हुए हैं। C-17 ग्लोबमास्टर विमान अफरा-तफरी के कारण सुबह ताजिकिस्तान में उतरना पड़ा था।  भारतीय दूतावास के स्टाफ और देश के अन्य लोगों को लाने के लिए एयरफोर्स का विमान काबुल पहुंचा है। अफगानिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया है, लेकिन मिलिट्री विमानों के जरिए अब भी लोगों को निकाला जा रहा है। 

काबुल पहुंचा भारतीय वायुसेना का विमान पाकिस्तानी एयरस्पेस से नहीं गुजरा बल्कि ईरान के रास्ते से काबुल पहुंचा। एक महीने पहले जब भारतीय वायुसेना का विमान कंधार स्थित भारतीय कौंसुलेट से अधिकारियों को लेकर आ रहा था तो पाकिस्तान ने फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति नहीं दी थी। काबुल एयरपोर्ट पर भारी भीड़ जमा हो गई है और अफरातफरी का माहौल है।

हजारों लोग अफगानिस्तान से निकलने की जद्दोजेहद में
अफगानिस्तान में पश्चिम समर्थित सरकार को तालिबान द्वारा उखाड़ फेंके जाने के बाद देश से निकलने की जद्दोजेहद में सोमवार को यहां हवाई अड्डे पर हजारों लोगों की भीड़ नजर आयी और वे विमान में चढ़ने के लिए आपाधापी करते नजर आये। अमेरिकी सैनिकों ने देश से निकलने की अफरा-तफरी की स्थिति को संभालने के क्रम में चेतावनी स्वरूप गोलियां चलायीं। राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से चले जाने के बाद रविवार को राजधानी काबुल पर तालिबान का कब्जा हो गया और इसी के साथ दो दशक के उस अभियान का आश्चर्यजनक अंत हो गया जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों ने देश को बदलने की कोशिश की थी। देश के पश्चिम प्रशिक्षित सुरक्षाबलों ने आक्रामक तालिबान लड़ाकों के सामने घुटने टेक दिये ।

तालिबान की बढ़ती पकड़ के बीच अमेरिका पर आतंकी खतरों को लेकर बढ़ी चिंता 
अमेरिका के एक शीर्ष जनरल ने कहा कि तालिबान द्वारा संचालित अफगानिस्तान से अमेरिका को बढ़े हुए आतंकी खतरों का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे वक्त आई है जब अमेरिका के समर्थन वाली अफगान सेना के इतनी तेजी से पांव उखड़ने को लेकर इन खतरों का अनुमान लगाने वाली खुफिया एजेंसियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अमेरिकी खुफिया अनुमान में एक हफ्ते से भी कम समय पहले कहा गया था विद्रोही काबुल को 30 दिनों में घेर सकते हैं, लेकिन दुनिया ने रविवार को चौंकाने वाली तस्वीरें देखीं कि तालिबान लड़ाके अफगान राष्ट्रपति के कार्यालय में खड़े हैं जबकि अफगान नागरिकों और विदेशियों की भीड़ देश के बाहर जाने की कोशिश में हवाईअड्डों पर पहुंच रहे हैं। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने रविवार को सिनेटरों को बताया कि अमेरिकी अधिकारियों के अफगानिस्तान में आतंकवादी समूहों के पुनर्गठन की गति के बारे में अपने पिछले आकलन को बदलने की उम्मीद है। 

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