
हलका वेस्ट में सांपला गुट के प्रदीप खुल्लर और मोहिंदर भगत गुट के सौरभ के बीच पैदा हुआ विवाद रविवार को उस समय गहरा गया जब दोपहर में जिला उप-प्रधान खुल्लर के समर्थकों ने मोहिंदर भगत के प्रचार बोर्ड उतारकर फेंक दिए। इन्होंने सीधा संकेत दे दिया कि अपनी ही पार्टी के कैंडिडेट से संबंध ठीक नहीं हैं।
यह फ्लैक्स बोर्ड प्रदीप खुल्लर के ऑफिस की इमारत पर लगे थे। प्रदीप खुल्लर ने भास्कर के सवाल पर कहा कि सांपला ग्रुप को इग्नोर किया जा रहा है। दस दिन पहले मंडल प्रधान सौरभ सेठ के साथ विवाद हुआ लेकिन मोहिंदर भगत ग्रुप लगातार इग्नोर कर रहा है। उधर, दो पदाधिकारियों के बीच विवाद बढ़ने से सीनियर लीडरशिप चिंतित है क्योंकि चुनाव सिर पर हैं।
मामला हल करने में जुटी सीनियर लीडरशिप- जिला प्रधान सुशील शर्मा
जिला प्रधान सुशील शर्मा ने कहा कि सीनियर लीडरशिप पूरे मामले को हल करने के लिए काम कर रही है। जल्द मसला हल हो जाएगा। भाजपा के चुनाव ऑफिस में जब सीनियर लीडरशिप नॉर्थ हलके में पार्टी की मजबूती के लिए कौंसलर रहे बालकिशन बाली को साथ ले रही थी तो उसी समय बस्ती एरिया में प्रदीप खुल्लर के समर्थक उनकी इमारत से मोहिंदर भगत के प्रचार के बोर्ड उतार रहे थे। मोहिंदर भगत खुद पूरे मामले में चुप हैं लेकिन उनके समर्थकों की रणनीतिक बैठक हुई है। इसमें फैसला हुआ कि वह सीनियर लीडरशिप को संदेश देंगे कि अगर खुद को सांपला गुट का बताने वाले नेता जालंधर में मोहिंदर भगत का विरोध करेंगे तो वह लोग भी फगवाड़ा जाकर एंटी लाबिंग करेंगे। जो जालंधर में बीजेगा, वो फगवाड़ा में काटेगा।
विवाद से भाजपा के लिए ये 3 बड़े चैलेंज
- आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट शीतल अंगुराल गुटबाजी का लाभ लेने के लिए सक्रिय हो गए हैं। वह रूठों को साथ लेना चाहते हैं।
- पहले ही प्रचार करने का समय 20 दिन बचा है। इसमें भी अगर वर्कर दो हिस्सों में बंटेंगे तो परेशानी होना तय है। क्योंकि विरोधी पहले से ही आदमी तोड़ने पर नजर गड़ाए बैठे हैं।
- विवाद जिला उप प्रधान प्रदीप खुल्लर तथा मंडल प्रधान सौरभ सेठ के बीच हुआ था। इसे खत्म करने को लीडरशिप ने समय लगा दिया।
जिस दिन भगत को टिकट मिली, सारे वर्कर इकट्ठा थे
पार्टी लीडरशिप उस मूल रणनीति को भी स्टडी कर रही है, जिसके तहत दो ग्रुप में वर्करों के बंटने की शुुरुआत हुई। जिस दिन मोहिंदर भगत को वेस्ट हलका से कैंडिडेट बनाया था, उस दिन सभी नेता इकट्ठा थे। अब यही बात कहकर लीडरशिप सबको शांत कर रही है। बता दें कि विजय सांपला फगवाड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अगर दोनों गुटों में जल्द सुलह नहीं होती तो मोहिंदर भगत के समर्थक उन्हें फगवाड़ा में नुकसान पहुंचा सकते हैं। नुकसान चाहे किसी भी गुट का ज्यादा हो लेकिन इसका प्रभाव पार्टी पर ही पड़ेगा। क्योंकि किसान आंदोलन के चलते भाजपा का आधार सूबे में पहले ही कम हुआ है।



