
काले खेती कानूनों के खिलाफ देश भर में किसानी आंदोलन चल रहा है। पंजाब इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है और पंजाब की 32 किसान जत्थेबंदियां सडक़ों पर हैं। नए मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के लिए अक्टूबर से शुरू होने वाली धान की खरीद सबसे बडी चुनौती होगी। केंद्र में मोदी सरकार है और धान की खरीद में कई तरह की नई स्पेसिफिकेशन भी आ गई हैं। सरकार अभी अफसरों के तबादले भी करेगी, जिसका सीधा प्रभाव धान की खरीद पर जा सकता है।
धान की खरीद का काम पंजाब का सबसे बड़ा काम है। सरकार और प्रशासन का डेढ महीना इस काम में लगता है। धान की खरीद को निर्विघ्न चलाने के लिए दूसरे विभागों के आई.ए.एस. अफसरों को भी विशेष तौर पर तैनात कर दिया जाता है। केंद्र सरकार के फैसले के द्वारा अब फसल की रकम सीधी किसानों के खातो में जाएगी, जिस कारण किसानों की जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। कोई भी आढ़ती किसानों की जमीन से ज्यादा फसल की खरीद नहीं कर सकता। केंद्र से खरीद के लिए सी.सी. लिमट मंजूर करवाना और स्पेसिफिकेशन में ढील दिलवाना एक बड़ा मुद्दा है।
चरनजीत सिंह चन्नी पहली बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने हैं। उनका केंद्र सरकार के साथ तालमेल बहुत कम है। ऐसे में धान की खरीद पंजाब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। यदि अपने पहले कार्यकाल में मुख्यमंत्री चन्नी सफलता के साथ काम न करवा सके तो सरकार को मुसीबतें होगी और पंजाब में किसानों के धरने लगेंगे। खरीद के साथ साथ ही मंडियों से धान की लिफ्टिंग और शैलरों में स्टोरेज भी एक बहुत बडी समस्या होती है। एफ.सी.आई. की स्पेसिफिकेशन के अनुसार कई बार खरीद एजेैंसियां नमी की मात्रा अधिक होने के कारण खरीद में आनाकानी करने लग जाते है, जिस कारण अक्सर ही किसान जत्थेबंदियां धरने शुरू कर देती हैं। आम तौर पर कोई भी सरकार सीजन से तीन महीने पहले खरीद के प्रबंध कर लेती हैं परन्तु पिछले कई महीनों से पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है, जिस कारण इस बार धान की खरीद के प्रति किसानों और आढ़तियों की चिंता बनी हुई है।



