प्रताड़ना की आपबीती:पुलिस बता मुझे गाड़ी में बिठाया इसलिए मैं घबराया नहीं रास्ते में फिरौती मांगी तब पता चला मुझे किडनैप किया है
अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बचकर आए राजन ने सुनाई 22 घंटे प्रताड़ना की आपबीती

20 सितंबर की सुबह जैसे ही मैं सब्जी मंडी के पास पहुंचा और गाड़ी से उतरने लगा तो एक गाड़ी आकर रुकी। उससे कुछ लोग उतरे और धक्के से मेरी ही गाड़ी में ले गए। मुझे बताया कि वे लोग सीआईए पुलिस से हैं। कहने लगे कि तेरे खिलाफ शिकायतें मिली हैं। तुम्हारे पिता को भी उठा लिया है। तुम दोनों से थाने ले जाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस की बात बताने के चलते मैं घबराया नहीं। उन लोगों ने मेरे मुंह पर कपड़ा डाल दिया ।
रास्ते में इन लोगों ने मुझे खाना भी खिलाया। जब इन्होंने मेरे घरवालों को फोन किया और पैसे मांगे तब मुझे अहसास हुआ कि मुझे किडनैप कर लिया है। किडनैपर मुझे धमका रहे थे कि अगर उनको पैसे नहीं मिले तो अच्छा नहीं होगा। किडनैपर्स ने मुझसे कोई मारपीट नहीं की, इससे भी मुझे भरोसा हो गया कि मुझे जान से नहीं मारेंगे। देर रात किडनैपर्स की पुलिस से बात हुई तब जाकर मुझे पता चला कि यह लोग मुझे अमृतसर के किसी कस्बे में लेकर पहुंच गए हैं। पुलिस से बात होने के बाद वे मुझे कार से बाहर छोड़ गए। डेढ़ घंटे बाद पुलिस पहुंच गई।



