जालंधरपंजाब

HUID के विरोध में उतरे गोल्ड कारोबारी, जालंधर में दुकानें बंद रख जताया रोष

ज्वेलर्स का आरोप है कि सरकार शोरूम तथा दुकानों पर पड़े स्टॉक को नए सिरे से एचयूआईडी नंबर लगाकर बेचने के निर्देश देकर उन्हें परेशान कर रही है। इसके विरोध में सोमवार को देशव्यापी हड़ताल की गई जिसका व्यापक असर देखने को मिला।

जालंधर। केंद्र सरकार के गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्क की अनिवार्यता और एचयूआईडी नंबर लगाना अनिवार्य किए जाने के विरोध में ज्वेलर्स ने जालंधर में दुकानें बंद रखीं। सोमवार को देश भर में गोल्ड कारोबारी इसके समर्थन में उतरे। उनका आरोप है कि सरकार शोरूम तथा दुकानों पर पड़े स्टॉक को नए सिरे से उक्त नंबर लगाकर बेचने के निर्देश देकर उन्हें परेशान कर रही है। इसके विरोध में सोमवार को देशव्यापी हड़ताल की गई जिसका व्यापक असर देखने को मिला। शहर के सराफा बाजार, लाल बाजार, शेखां बाजार, कलां बाजार, भट्टा वाली गली, जीटी रोड व अटारी बाजार के साथ लगते इलाकों सहित प्रमुख बाजारों में स्वर्ण आभूषणों की दुकानें बंद रहीं।

इस दौरान गोल्ड कारोबारियों में सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। शहर के स्वर्ण आभूषण व्यापारी, गोल्ड व्यापारी, स्वर्णकार संघ सहित सोने के कारोबार से जुड़े हुए तमाम व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे गएजालंधर सराफा एसोसिएशन के प्रधान नरेश मल्होत्रा ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते गोल्ड के पेशे से जुड़े व्यापारी भारी मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोल्ड ज्वेलरी की बिक्री पर हॉलमार्क लगे होने की अनिवार्यता का उन्होंने कभी भी विरोध नहीं किया है। इस नियम को लागू करवाने में देशभर के व्यापारी भाइयों ने सरकार का साथ दिया है। अब इस पर नया नियम निर्धारित कर के व्यापारियों को दोहरी मार मारी गई है। खासकर छोटे दुकानदार को काम करना मुश्किल हो जाएगा।
इसी तरह जालंधर स्वर्णकार संघ के प्रधान हरजीत सिंह ने कहा कि महंगाई के दौर में स्वर्ण आभूषण कारोबार भारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। जब से कोरोना की शुरुआत हुई है तब से लेकर अभी तक कारोबार की गाड़ी ट्रैक पर नहीं आई है। ऐसे में सरकार को गोल्ड कारोबार को प्रफुल्लित करने में विभिन्न प्रकार की घोषणाएं करनी चाहिए थी। जबकि नए नियम निर्धारित करके उनकी परेशानी बढ़ाई गई है। इसी तरह गोल्ड कारोबारी कुलभूषण धवन बताते हैं कि सरकार को यह नियम जल्द से जल्द वापस लेना चाहिए। अन्यथा व्यापारियों को इस समस्या के समाधान के लिए अगली रणनीति तय करनी पड़ सकती है।

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