Punjab News: जानें कौन हैं पंजाब राज्यसभा चुनाव के लिए AAP के उम्मीदवार अशोक मित्तल
पंजाब राज्यसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के अशोक मित्तल पंजाबी की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं.

पंजाब की पांच सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. इस लिस्ट में अशोक मित्तल का नाम भी है. अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं और इस यूनिवर्सिटी की शुरुआत साल 2001 में हुई थी. आज के समय में करीब 50 से अधिक देशों के छात्र लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं.
पंजाब में आप के टिकट पर राज्यसभा का चुनाव लड़ने वाले अशोक मित्तल ने लॉ में ग्रेजुएशन किया है. हिंदुस्तान में हुए बंटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान से पंजाब आया था. यहां पर उनके पिता स्वर्गीय बलदेव राज मित्तल ने 500 रुपये के कर्ज से जालंधर में 10X10 की एक मिठाई की दुकान ली. इस दुकान के कारण उनके बड़े भाई रमेश और नरेश ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी और फिर अपने पिता के साथ दुकान में हाथ बांटने लगे.
मित्तल परिवार की मिठाई का कारोबार इतन बढ़ा कि इन्होंने लवली स्वीट्स के नाम से एक शो रूम खोला जो आज एक मॉल में बदल गया है. यहां पर कई तरह की मिठाईयां मिलती हैं. मित्तल परिवार के इस कारोबार में फिर पढ़े लिखे अशोक मित्तल की एंट्री हुई.
अशोक ने अपने कारोबार को मिठाइयों के अलावा और क्षेत्रों में भी बढ़ाने की सोचा. इस दौरान उन्होंने ऑटो सेक्टर में अधिक दिलचस्पी दिखाई और बजाज की डीलरशिप ली. साल 1991 में उन्होंने लवली ऑटो के नाम से डीलरशिप शुरू की और फिर मारूति सुजुकी की डीलरशिप भी इन्हें मिली और इस तरह से लवली ऑटो का नाम पंजाब में छाने लगा.
इस कारोबार के बाद अशोक मित्तल ने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा. साल 2001 में पंजाब के फगवाड़ा में कॉलेज खोला जा 3.5 एकड में फैला हुआ है. आज यही कॉलेज लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है. साल 2005 में पंजाब सरकार ने इस कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया था.
भज्जी के AAP में आने की इनसाइड स्टोरी:राजनीतिक करियर की सेफ शुरुआत; पंजाब में विरोध देख भाजपा से दूरी बनाई; हरभजन के साथ आप को भी फायदा…
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने पॉलिटिकल इनिंग शुरू कर दी। उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) ने पंजाब से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पहले हरभजन सिंह की भाजपा से जुड़ने की चर्चा थी। बीच में पंजाब कांग्रेस चीफ रहे नवजोत सिद्धू भी उन्हें कांग्रेस में शामिल करवाने पहुंच गए। हालांकि भाजपा और कांग्रेस को झटका देकर भज्जी ने सेफ गेम खेला और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए।
आप में शामिल होने की 3 बड़ी वजहें
- क्रिकेट से संन्यास के बाद भज्जी ने मॉडलिंग और एक्टिंग में किस्मत आजमाई लेकिन कामयाबी नहीं मिली। उनके पास सिर्फ क्रिकेट कमेंट्री का काम रह गया था। यानी एक तरह से भज्जी के राजनीतिक करियर को आप में सेफ शुरूआत मिल गई है।
- हरभजन पंजाब में रहकर क्रिकेट एकेडमी चलाते हैं। इसलिए वह पंजाब में रहना चाहते थे। यहां डबल फायदा हो गया। वह पंजाब से चुने जा रहे हैं और यहां सरकार भी आम आदमी पार्टी की है।
- आम आदमी पार्टी में भज्जी को बड़ा राजनीतिक प्लेटफार्म मिल गया। फिलहाल आप में अरविंद केजरीवाल के बाद कोई राष्ट्रीय चेहरा नहीं है। इससे भज्जी को राजनीतिक तौर पर आप में बड़े स्तर पर मौका मिल सकता है।
भाजपा से दूरी क्यों?
- किसान आंदोलन से शुरू हुआ भाजपा का विरोध थम नहीं रहा। पंजाब चुनाव में भाजपा को 117 में से सिर्फ 2 सीटें मिली। ऐसे में पंजाब में भाजपा के साथ भज्जी को अपना राजनीतिक भविष्य ज्यादा बेहतर नहीं दिखा।
- भाजपा उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद बनाने का भरोसा दे रही थी। इससे पंजाब से भज्जी की दूरी बढ़ जाती। पंजाब में उन्हें क्रिकेट एकेडमी भी चलानी थी, इसलिए वह भाजपा के साथ नहीं गए।
- भाजपा में दिग्गजों की भीड़ है। ऐसे में हरभजन का चेहरा भी उन्हीं के बीच खो जाता। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने और भुनाने के लिए भाजपा में ज्यादा मौका नहीं मिल पाता।

हरभजन के कदम से किसे फायदा?
सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा चेहरा मिल गया। अरविंद केजरीवाल हरभजन की क्रिकेट की पहचान को भुनाएंगे। दूसरा सिख चेहरे को चुनने से पंजाब में भी अच्छा संदेश गया। खिलाड़ी को सांसद बनाने से दूसरे खिलाड़ी पार्टी से प्रभावित होंगे। उन्हें लगेगा कि पंजाब सरकार और खासकर अरविंद केजरीवाल खेल को गंभीरता से ले रहे हैं। पंजाब में स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए हरभजन की मदद मिलेगी। हरभजन के बहाने यूथ का सपोर्ट भी मिलेगा।

फिरकी जैसी राजनीतिक करियर की शुरूआत
फिरकी गेंदबाज रहे हरभजन सिंह के राजनीतिक करियर की शुरूआत भी फिरकी से कम नहीं रही। उनकी शुरूआती बात भाजपा से हुई। भाजपा उन्हें पंजाब में CM चेहरे की तरह केंद्र में रखकर चुनाव लड़ाने को तैयार थी। हरभजन ओबीसी कैटेगिरी से आते हैं। इसीलिए भाजपा उन पर दांव खेलना चाहती थी। हालांकि जब कांग्रेस ने दलित चेहरा चरणजीत चन्नी को आगे कर दिया तो भाजपा इससे पीछे हट गई।
इसके बाद कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू चुनाव से पहले ही हरभजन से मिले। सिद्धू चाहते थे कि वह चुनाव लड़ें। हरभजन के कांग्रेस में आने की उम्मीद भी थी। हालांकि यह खेल तब खराब हो गया, जब कांग्रेस ने सिद्धू को ही किनारे कर चरणजीत चन्नी को CM चेहरा बना दिया।
कांग्रेस में मौका न देख हरभजन और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल का संपर्क हुआ। हरभजन चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, इसलिए उन्हें चुनाव के बाद राज्यसभा भेजने के बारे में चर्चा हुई। पंजाब में 5 सीटें खाली भी हो रही थी। 10 मार्च को आप की सरकार बन गई। जिसके बाद हरभजन ने केजरीवाल से मुलाकात की और वह पंजाब से आप के राज्यसभा उम्मीदवार बन गए।