Punjab Election 2022: जानिए चुनाव में जमानत जब्त होने का मतलब, जालंधर में पिछली बार 54 प्रत्याशी इसे नहीं बचा पाए
Punjab Election 2022 किसी भी प्रत्याशी को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र भरते समय दस हजार रुपये सिक्योरिटी राशि जमा करवानी होती है। चुनाव में कुल डाले गए मतों का छठवां हिस्सा मिलने पर ही यह राशि उसे लौटाई जाती है। अन्यथा जब्त कर ली जाती है।

जालंधर। चुनाव में जमानत जब्त करवा दूंगा। कई बार नेता यह धमकी विरोधियों को देते नजर आते हैं। कई बार आम लोगों को यह पता नहीं होता कि चुनाव में जमानत जब्त होने का मतलब क्या होता है। आइए हम आपको बताते हैं कि यह जमानत जब्त कैसे होती है और इसकी क्या प्रक्रिया है। दरअसल नामांकन पत्र भरते समय प्रत्याशी को दस हजार रुपये की धनराशि सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा करवानी होती है। जब कोई प्रत्याशी चुनाव में कुल मतों का छठवां हिस्सा प्राप्त करने में विफल हो जाता है तो आयोग यह राशि जब्त कर लेता है अन्यथा उसे वापस कर दी जाती है। इसके अलावा कई अन्य परिस्थितियों में प्रत्याशी को जमानत राशि वापस कर दी जाती है।
इन हालात में वापस मिलती है जमानत राशि
- अगर नामांकन पत्र चुनाव आयोग द्वारा खारिज कर दिया जाए।
- प्रत्याशी द्वारा निर्धारित समय सीमा में नामांकन वापस ले लिया जाए।
- वोटिंग शुरू होने से पहले किसी प्रत्याशी का निधन हो जाए तो स्वजन क्लेम कर सकते हैं।
- प्रत्याशी द्वारा अपने हलके में कुल मतदान का छठा हिस्सा हासिल कर लिया जाए।
- प्रत्याशी द्वारा छठा हिस्सा हासिल न कर पाने के बावजूद चुनाव जीतने पर राशि लौटा दी जाती है।
- ऐसे प्रत्याशियों की जमानत होती है जब्त
- जब भी कोई प्रत्याशी किसी चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोटों का छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी हलके में एक लाख लोगों ने वोट दिया है तो जिस उम्मीदवार को 16,667 से कम वोट मिलेंगे, उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है। बता दें कि ये जमानत राशि प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय चुनाव आयोग के पास जमा करवाई होती है।
जालंधर में 84 में से 54 की जमानत हुई थी जब्त
साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जिले के 54 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके थे। भले ही इसमें राष्ट्रीय स्तर की किसी भी पार्टी का प्रत्याशी शामिल नहीं था, लेकिन जिन छोटे दल तथा आजाद प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी, उनकी साख जरूर प्रभावित हुई। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार प्रत्याशियों की संख्या अधिक है। ऐसे में जमानत जब्त होने वाले प्रत्याशियों की संख्या भी अधिक हो सकती है।दरअसल, पिछली बार जिले के नौ विधानसभा हलकों से चुनाव लड़ रहे कुल 84 प्रत्याशियों में से 54 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके थे। इसमें शिवसेना, आजाद, समाजवादी पार्टी तथा बसपा के प्रत्याशी भी शामिल थे।