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राज्य भर की सब्जी मंडियों में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (नेफेड) खराब प्याज कर रही सप्लाई…* 2 रूपये किलो भाव में नही बिक रहा नेफेड का खराब प्याज –  * राज्य भर की सब्जी मंडियो में थोक में 10 से 15 रूपये प्रति किलो व 20 से 25 रूपये रिटेल मे बिक रहा है नासिक व इंदोरी प्याज…

Journalist Shelly

जालंधर : (NAFED) : भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (नेफेड) द्वारा पंजाब की सब्जी मंडियों में खराब प्याज की सप्लाई हो रही है।

मकसूदां नई सब्जी मंडी जालंधर में नेफेड द्वारा तीन कंपनियों को प्याज की सप्लाई हेतु मंजूरी दी गई है।मंडी में खराब प्याज की सप्लाई लेकर आए ट्रकों में प्याज की हालत इतनी दयनीय है कि मंडी कारोबारियों को 50 किलो की बोरी की बिक्री हेतु 2 रूपये प्रति किलो के ग्राहक भी नही मिल पा रहे है व कोई भी ग्राहक 100 रूपये बोरी लेने को भी तैयार नहीं है। खराब प्याज की सप्लाई कारण मंडी में वातावर्ण दुर्गंधमयी बन रहा है। नेफेड का कारोबार करने बाले आढ़तियों को प्याज की छटाई के लिए मजबूरन अतिरिक्त लेबर लगानी पड़ रही है। वर्णनीय है कि नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) द्वारा उपभोक्ताओं को किफायती कीमतों पर प्याज उपलब्ध करबाती है, जो मुख्य रूप से मूल्य स्थिरीकरण और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किए जाते हैं।नेशनल एग्रीकल्चरल को-आपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन आफ इंडिया (नेफेड) द्वारा गत सप्ताह से खुदरा प्याज बिक्री की शुरुआत हुई।देश भर के 574 केंद्रों से प्राप्त प्याज सहित 38 वस्तुओं की दैनिक कीमतों की विभाग निगरानी कर रहा है।

 

 गौरतलब है कि राज्त भर की थोक मंडियों में नासिक प्याज 14-15 रूपये प्रति किलो,इंदौरी प्याज 13-14 रूपये प्रतिकिलो व रिटेल में 20-25 रूपये प्रति किलो भाव में बिक्री हो रही है वही नेफेड द्वारा प्याज 5-12 रूपये प्रतिकिलो भाव में बिक्री हेतु उपलब्ध है लेकिन नेफेड द्वारा मंडियों में बिक्री हेतु भेजी जा रही खराब व मिक्स क्वालिटी की खेप ने संबधित विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिऐ है व प्याज की खराब क्वालिटी के चलते 2 रूपये प्रति किलो में बिक्री नही हो रही व कारोबारियो द्वारा मजबूरन प्याज को कूड़े के ढेर मे फैकना पड़ रहा है। वही महाराष्ट्र के किसानो का कहना है कि महाराष्ट्र के प्याज किसानों को प्याज की उत्पादन लागत 18-20 रुपये प्रति किलो पड़ रही है. इसके बावजूद, उन्हें बाजार में मुश्किल से 10 रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान मिल रहा है। इसका मतलब है कि किसानों को अपनी लागत का भी आधा पैसा नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।नेफेड और उसकी एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी) दिया जा रहा है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह दावा पूरी तरह से झूठा और खोखला है।नेफेड की एजेंसियों ने बाजार में पहले से जमा किया गया प्याज सस्ते में बेचा और साथ ही खराब गुणवत्ता का प्याज भी सप्लाई कर रही है।

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