अमृतसरआस्थाकपूरथला / फगवाड़ागुरदासपुरचंडीगढ़जम्मू-कश्मीरजालंधरपंजाबपटियालाफिरोज़पुरराष्ट्रीयलुधियानाहरियाणाहिमाचलहोशियारपुर

Radha Kund Snan: निसंतान अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में करें स्नान, भरेगी सूनी गोद- Ahoi Ashtami 2021: अहोई अष्टमी व्रत रखने वाली माताएं ये पढ़ना न भूलें

2021 Radha Kunda Snan date and time on Ahoi Ashtami: संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी पर राधा कुंड पर महिलाओं द्वारा किए जाने वाले स्नान का अपना ही एक विशेष महत्व है। मथुरा में गोवर्धन पर्वत की छोटी परिक्रमा के दौरान दो दिव्य कुंड रास्ते में आते हैं। जिनमें एक है कृष्ण कुंड और दूसरा है राधा कुंड। कृष्ण कुंड का पानी काले रंग का प्रतीत होता है व राधा कुंड का पानी निर्मल दिखता है। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जोकि 28 अक्टूबर 2021 को बृहस्पतिवार के दिन 12:51 पी एम से लेकर अगले दिन 29.10.2021 को 02:11 पी एम तक रहेगी। इसी ही दिन यह विशेष स्नान किया जाता है।

Radha Kund Snan shubh muhurat: वैसे तो कुंड में सारा दिन कभी भी स्नान कर सकते हैं परंतु विशेष दिन विशेष समय विशेष मुहूर्त में किया गया उपाय बहुगुणा प्रभाव प्रदान करने वाला होता है इसलिए दिव्य स्नान का पहला मुहूर्त 06:38  पी एम से 8:33  पी एम तक व दूसरा मुहूर्त रात्रि 01:09 ए एम से 03:23 ए एम तक है। यह दिव्य स्नान अर्धरात्रि के समय पूर्व फलदाई होता है।

Radha kund snan ahoi ashtami: पौराणिक प्रचलन व पौराणिकताओं के आधार पर निसंतान दंपत्ति अगर शुभ मुहूर्त पर राधा कुंड पर विधिवत तरीके से स्नान करते हैं तो राधा रानी की कृपा स्वरूप उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। इसकी लोकप्रियता सिर्फ भारत देश में ही नहीं है अपितु विदेशों में भी है इसलिए बहुत संख्या में विदेशी दंपतियों को भी यहां स्नान करते व मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात धन्यवाद करते हुए भी देखा जाता है।

PunjabKesari Radha Kund Snan

Radha Kund Snan: मान्यता है कि मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात फिर से प्राप्त संतान के साथ राधा कुंड में दिव्य स्नान के लिए परिवार सहित धन्यवाद यज्ञ करने के लिए अवश्य आना चाहिए ताकि जो संतान प्राप्त हुई है। उस संतान का पूर्ण सुख भी प्राप्त हो सके व संतान दीर्घायु हो तथा पूर्ण स्वस्थ रह सके।

Ahoi Ashtami 2021: अहोई अष्टमी व्रत रखने वाली माताएं ये पढ़ना न भूलें

Ahoi Ashtami 2021: संतान प्राप्ति की मनोकामना एवं संतान की हर प्रकार से सुरक्षा लंबी आयु तथा बेहतर स्वास्थ्य के लिए रखा जाने वाला व्रत जो कि अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती स्वरूपा अहोई माता की पूजा अर्चना करके किया जाता है। यह व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि- जो कि 28 अक्टूबर 2021 को बृहस्पतिवार को है।

PunjabKesari Ahoi Ashtami

Ahoi Ashtami Puja Muhurat: इस दिन पूजा करने का मुहूर्त 05:39 पीएम से 06:56 पीएम है।

PunjabKesari Ahoi Ashtami

Ahoi ashtami vrat vidhi: अहोई अष्टमी पर माताएं स्वच्छ व पवित्र होकर घर में पार्वती स्वरूपा अहोई माता व शिवजी के समक्ष व्रत का संकल्प करें। सारा दिन बिना जल व निराहार रहें। अहोई माता का घर में चित्र लगाकर धूप, दीप, रोली, मोली, फूल इत्यादि अर्पण करें तथा दूध फल व मिठाई इत्यादि भी अर्पण करें। बच्चों की कलाई पर पीले रंग का धागा रक्षा सूत्र के रूप में बांधे। एक चांदी के मनकों वाली माला जिसमें की लॉकेट पर अहोई माता का चित्र अंकित हो, मिट्टी के कलश की स्थापना करें व हल्दी से कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं, आटे का दीपक जलाएं, गेहूं के सात दाने या कुछ दक्षिणा हाथ पर रखें तथा नीचे दी गई कथा को पढ़ें या सुनें। तत्पश्चात माला को पहने व गेहूं के दाने तथा दक्षिणा घर की बड़ी महिला को देवे एवं आशीर्वाद प्राप्त करें। सायंकाल के समय तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलें। कलश के जल को दीपावली वाले दिन अपने घर में छीटां देवें तथा अहोई माता के लॉकेट वाली माला को दीपावली के दिन तक पहने व दिवाली के बाद संभाल कर रख लें।

PunjabKesari Ahoi Ashtami

Ahoi ashtami vrat katha अहोई अष्टमी व्रत कथा
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार- दीपावली के अवसर पर एक घर को लीपने के लिए एक साहूकार की सात बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो उनकी ननंद भी उनके साथ चली गई। साहूकार की बहुएं जिस जगह पर मिट्टी खोद रही थी, उसी स्थान पर एक स्याहु अपने बच्चों के साथ रहती थी। मिट्टी खोदते समय खुरपी से एक बच्चा मर गया इसलिए जब भी साहूकार की बेटी को बच्चा होता तो वह 7 दिन के अंदर ही मृत्यु को प्राप्त होता।

इस घटना के बाद जब साहूकार ने एक ज्योतिषाचार्य से पूछा तो उन्होंने स्याहु के बच्चे की मृत्यु के पाप कर्म के बारे में अवगत करवाया जो कि अनजाने में हुआ था। तो उपाय स्वरूप अहोई माता की पूजा कर इस पाप से मुक्ति की प्रार्थना करने को कहा तो साहूकार की बेटी द्वारा विधिवत व्रत इत्यादि रखा गया। माता अहोई प्रकट हुई व माता ने सभी मृत बच्चों को पुनर्जीवित कर दिया। तब से संतान प्राप्ति एवं संतान की लंबी आयु व सुरक्षा के लिए यह व्रत किया जाने लगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page