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चलते-चलते बढ़ रहे फासले:मुंबई में हर दिन औसतन 22 तलाक की याचिकाएं, दिल्ली में रोज 15-20 केस, कहां चूक रहे हैं कपल्स?

  • दिल्ली में तलाक के रोजाना होते हैं 18 से 20 केस दर्ज
  • महिलाओं का करियर पर ज्यादा फोकस करना भी है कारण
  • एक-दूसरे से अधिक उम्मीदें लगाने से भी हो रहे हैं तलाक

मुंबई में पिछले दस साल (2011-2020) के दौरान हर दिन औसतन 22 तलाक याचिकाएं दर्ज की जा रही हैं। पिछले साल, पैनडेमिक के दौरान छह महीने कोर्ट बंद रहने के बावजूद बांद्रा फैमिली कोर्ट में, औसतन 19 तलाक की याचिकाएं दर्ज की गईं। इनमें से ज्यादातर याचिकाओं में तलाक का कारण एक-दूसरे से अधिक उम्मीदें लगाना, पार्टनर का ध्यान नहीं रखना, पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर लड़ाई-झगड़े होना है।

द इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वुमन के अनुसार, हर दिन तलाक के आंकड़ों की बात करें तो पहले की तुलना में अब ऐसे मामले काफी ज्यादा बढ़े हैं। पहले तलाक का कारण घरेलू हिंसा, दहेज की मांग और मारपीट होता था। लेकिन समय के साथ तलाक का कारण भी बदल गया है। अब लोग छोटी सी बात पर भी तलाक के लिए याचिका लगा रहे हैं।

क्या है दिल्ली का हाल ?

दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट के वकील महमूद आलम कहते हैं कि दिल्ली में 6 कोर्ट कॉम्पलेक्स हैं। हर जिले में 2 फैमिली कोर्ट हैं, जहां मैट्रिमोनियल केस दर्ज किए जाते हैं यानी 11 जिलों में 22 फैमिली कोर्ट हैं। आंकड़ों की बात करें तो सटीक डाटा दे पाना मुश्किल है। लेकिन लगभग हर कोर्ट में रोजाना 15 से 20 तलाक की याचिकाएं दर्ज की जाती हैं।

महमूद आलम कहते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं की तरफ से तलाक की अधिक याचिकाएं दायर की जा रही हैं। तलाक के मुख्य कारणों में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, एक-दूसरे की बेइज्जती करना, सोच में मतभेद और एक-दूसरे के लिए समय न होना है। उनका कहना है कि अगर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह से रोजाना 15 केस दर्ज होते हैं तो इनमें से 14 मामलों में पति का ही बाहर किसी से संबंध पाया जाता है।

क्या कहते हैं मैरिज काउंसलर ?

मैरिज काउंसलर अनुपम तलवार कोहली कहती हैं कि शादीशुदा वर्किंग वुमन को उम्मीद होती है कि घर में अगर दोनों कमाने जा रहे हैं तो पति भी पत्नी की घर के काम में मदद करें। लेकिन पति को लगता है कि पारंपरिक रिवाजों के चलते महिलाओं को ही पूरा काम करना चाहिए। उनकी जिम्मेदारी घर के काम में हाथ बंटाना नहीं है। महिलाएं अब ज्यादा करियर ओरिएंटेड हो रही हैं और वे अपने जॉब की जिम्मेदारियों को बहुत अहमियत देती हैं। क्योंकि वे जानती हैं कि उनके लिए करियर कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही वे अपने घर की जिम्मेदारियों को भी बखूबी समझती हैं। वे यह जानती है कि उन्हें एक ही समय में घर और ऑफिस के बीच बेस्ट काम करना है। कपल के बीच खटपट का सबसे बड़ा कारण यही है।

वर्किंग वुमन के सामने आती हैं कई दिक्कतें
वर्किंग वुमन के सामने आती हैं कई दिक्कतें

मैरिज काउंसलर की राय ट्रू केयर काउंसलिंग की फाउंडर कहती हैं कि हर इंसान अलग होता है। उसी तरह उनके लिए शादी के भी अलग-अलग मायने होते हैं। अब शादी में सब्र पूरी तरह भले ही गायब न हुआ हो, लेकिन कम जरूर हुआ है। पहले महिला घर संभालती थी और पुरुष बाहर जाकर पैसे कमाता था। अब महिलाएं पढ़ी-लिखी हो रही हैं और उनका भी अपना करियर है। उन्हें घर के साथ-साथ बाहर की जिम्मेदारी भी संभालनी है। वे चाहती हैं कि पति जिम्मेदारियां शेयर करें और उनके काम में हाथ बटाएं, जबकि पति को लगता है कि ये उनका काम नहीं है। समाज कुछ मामले में तो स्त्री के लिए बदला है, लेकिन हर मामले में नहीं। उसी तरह पुरुष की सोच भी बदली है, लेकिन अभी बहुत कुछ बदलना बाकी है।

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का करियर पर ज्यादा फोकस
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का करियर पर ज्यादा फोकस

ये जरूरी नहीं है कि शादी के बाद सभी कपल की लाइफ हैप्पी हो। जिस रिश्ते में प्यार होता है, वहां तकरार भी होती है। शादी का फैसला दो व्यक्ति मिलकर लेते हैं, अब जब रिश्ते में दरार आ रही हैं तो आपको मिलकर ही इसका सामना करना चाहिए। दूसरों के सामने अपने पार्टनर की खूबियां बताएं और उनकी तारीफ करें। आपने उनकी इन्हीं क्वालिटी को देखकर पूरा जीवन साथ बिताने का फैसला किया था।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
मनोचिकित्सक बिंदा सिंह कहती हैं कि पति-पत्नी के बीच मुख्य मुद्दा ईगो है। आज लोग पढ़े-लिखे और डिपेंडेंट हो रहे हैं। पत्नी को लगता है कि वो अपना खर्च खुद उठा सकती है तो वो अपनी बेइज्जती सुनकर साथ क्यों रहें। अब लोग एक बार के झगड़े में भी तलाक के लिए याचिका दाखिल कर देते हैं। ऐसे केस में बच्चे इंसिक्योर हो जाते हैं। दो फैमिली बर्बाद हो जाती है।

ईगो की वजह से बर्बाद रहे रिश्ते
ईगो की वजह से बर्बाद रहे रिश्ते

पहले जॉइंट फैमिली होती थी तो दो लोगों के बीच के मुद्दों के सुलझाने के लिए घर में कोई तीसरा होता था। अब खुद लड़ते हैं। एक-दूसरे की बात को सुनने का वक्त किसी के पास नहीं हैं। रिश्तों में खटपट का बड़ा कारण दोनों की फैमिली की तरफ से दखलांदाजी भी है। कई ऐसे केस देखने को मिले हैं, जिनमें लड़की के घरवालों को उसका पति भला बुरा कहता है। फिर भी पत्नी अपने रिश्ते को बचाने के लिए हर एक कोशिश करती है।

रिश्ते बचाने के तरीके

  • अपने पार्टनर को हर रोज कॉल करें ।
  • एक साथ डिनर करने का वक्त निकालें।
  • एक-दूसरे की तारीफ करें।
  • अपने पार्टनर का सपोर्ट करें ।
  • सप्ताह में एक दिन बाहर घूमने का प्लान करें ।
  • बेवजह भी पार्टनर को गिफ्ट दें।
  • किसी खास दिन को साथ सेलिब्रेट करें (जैसे- रोज डे, चॉकलेट डे)।
  • किसी दिन सरप्राइज डिनर का प्लान करें।

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