वोटर हुआ समझदार – : मीडिया के सर्वे-मीडिया की हवा हुई बे-असर – लाॅलीपाप की जगह विकास पर दबेगा बटन- 2017 के जालंधर विधान सभा चुनाव के परिणाम आपकी नजर
जट्ट लैंड में DIGITAL कैंपेनिंग:ट्रैक्टर रैलियों वाले पंजाब में मोबाइल की स्क्रीन तक सिमटा प्रचार, POLITICAL पार्टियों में AAP की टीम सबसे बड़ी

वोटर समझदार हो चुका है व मीडिया के सर्वे-मीडिया की हवा का रूख देखने के वावजूद वोटर अपनी समझ से लाॅलीपाप देने वालों की जगह विकास करवाने वाले उम्मीदवारों पर को विजयी बनाएगा।उम्मीदवार किसी पार्टी का हो इस पर वोटर अब ज्यादा माथापच्ची करने की जगह अच्छी छवि वाले उम्मीदवार को वोट देगा। वोटरों अनुसार देश व राज्य की कामयाबी व तरक्की हेतु सत्ता परिवर्तन इसलिए जरूरी हो चुका है क्योकि लगातार सत्तासीन होने वाली पार्टी सत्ता को अपनी विरासत समझ वोटरों की कदर भूल जाती है। मुकाबले सटरोंग होने पर ही वोटर की अहमियत का पता चलता है। जो सुविधाए अब दी जा रही है वह अब ही क्यू ? ऐसे बहुत से सवालों के जबाब जनता चुनावों में देगी। रोजी-रोटी-परिवार पालन में व्यस्त जनता अब मीडिया के सर्वों या मीडिया की हवा के रूख के आधार को समझ चुकी है जिसके तहत वह अपनी वोट का इस्तेमाल अपनी समझ से करेगी।
जालंधर उत्तर में 2017 में इंडियन नेशनल कांग्रेस से अवतार सिंह जूनियर ने भारतीय जनता पार्टी के के.डी. भंडारी को 32291 वोटों के मार्जिन से हराया था।
जालंधर केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के दिग्गज तथा कुल तीन बार और पिछले दो बार से लगातार विधायक मनोरंजन कालिया को कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजिंदर बेरी के हाथों 19 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा. वर्ष 2012 के चुनाव में कालिया ने बेरी को एक हजार से अधिक मतों से हराया था.
जालंधर पश्चिम विधानसभा सीट (Jalandhar West Assembly Seat) पंजाब की महत्वपूर्ण सीट हैं. जहां 2017 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. जालंधर जिले में आने वाली जालंधर पश्चिम विधानसभा सीट पर 2017 में कांग्रेस से सुशील कुमार रिंकू ने भारतीय जनता पार्टी के महिंदर पाल भगत को 17334 मतों के अंतर से हराया था. यह सीट (Jalandhar West Assembly Seat) शिरोमणि आकाली दल और भाजपा के गठबंधन में भाजपा के पास थी. 2012 में भाजपा के चुन्नी लाल भगत 48,207 मतों के साथ कांग्रेस के सुमन केपी को हराकर जीत दर्ज किया था.
इस दफा आप पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार मुकाबले में उतारे है।जिससे मुकाबले काफी रोचक होने की संभावना है।किसी भी पार्टी की राहें अपनों की बगाबत के चलते आसान नही है। सिर्फ पैसे की शक्ती के बल पर या पैसे से एकत्रित भीड़ के बल पर वोट मांगना विजय नही करेगा। पब्लिक सब समझती चुकी है।राजनीति में सिर्फ लीडर ही नही अब वोटर भी कलाकारी सीख चुके है वफादारी के बल की सभी को जरूरत है।
जट्ट लैंड में DIGITAL कैंपेनिंग:ट्रैक्टर रैलियों वाले पंजाब में मोबाइल की स्क्रीन तक सिमटा प्रचार, POLITICAL पार्टियों में AAP की टीम सबसे बड़ी
कोरोना महामारी के बीच आए चुनाव ने ट्रैक्टर रैलियों वाले जट्ट लैंड में चुनाव प्रचार को मोबाइल की स्क्रीन तक सीमित कर दिया है। निर्वाचन आयोग ने किसी भी प्रकार की रैली या नुक्कड़ सभा पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं, राजनीतिक दलों और कैंडिडेटों ने DIGITAL माध्मय से प्रचार का रास्ता अपनाया और इसके लिए विशेष टीमें बैठा दी हैं। पंजाब की POLITICAL पार्टियों में सबसे बड़ी डिजिटल टीम आम आदमी के पास है।
पंजाब में पांच बड़े POLITICAL फ्रंट चुनावी दंगल में हैं। इनमें सत्ताधारी कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन, किसान संगठनों का संयुक्त समाज मोर्चा और भाजपा-कैप्टन अमरिंदर सिंह-ढींडसा का गठबंधन शामिल हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने सोशल मीडिया सेल बना रखे हैं। किसान आंदोलन के बाद सामने आया संयुक्त समाज मोर्चा पार्टी इस मामले में अभी पीछे है। मोर्चा का अभी तक किसी भी प्लेटफार्म पर कोई ऑफिशियल पेज नहीं है।
राजनीतिक दलों की टीमों में डिजिटली साउंड यानी डिजिटल कामकाज में दक्ष लोगों, जो IT और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में प्रशिक्षित लोगों को टीम में शामिल कर रहे हैं। ये टीमें स्टेट लेवल के साथ-साथ जिला और बूथ लेवल पर पार्टियों के प्रचार में लगी हैं। हर दल की टीम में 100 से 200 लोगों की टीम लगी है, कुछ दल आउटसोर्सिंग पर भी टीमें हायर कर रहे हैं। वहीं अधिकतर कैडिडटों ने भी अपना सोशल मीडिया हैंडल करने के लिए टीम तैयार कर रखी है।
पंजाब में AAP की सबसे बड़ी सोशल मीडिया टीम
आम आदमी पार्टी की टीम अन्य राजनीतिक दलों के मुकाबले थोड़ी बड़ी है। AAP की टीम जो एक ही स्थान पर बैठने के बजाय मूविंग में रहती है। डेढ़ 100 के करीब लोग टीम में काम कर रहे हैं। इनमें कैमरामैन, वीडियो एडीटर, एसईओ एक्सपर्ट, सोशल मीडिया मैनेजर्स शामिल हैं। टीम सिर्फ आम आदमी पार्टी का ऑफिशियल पेज ही नहीं देखती बल्कि पार्टी के नाम पर कई अन्य पेज या सोशल मीडिया अकाउंट भी हैंडल करती है। विरोधी नेताओं और पार्टियों के सोशल मीडिया पर भी नजर रखते हैं, उन्हीं की भाषा में जवाब देते हैं।
भाजपा-कांग्रेस के प्रचार की कमान 100-100 एक्सपर्ट के हाथ
राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया टीम सबसे बड़ी और तेज है। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने डिजिटल प्रचार के लिए 10 जनवरी तक 11150 लोगों की टीम लगा दी। हालांकि भाजपा की ऐसी तैयारी पंजाब में नहीं दिख रही। सूबे में भाजपा की 100 सदस्यीय सोशल मीडिया टीम वर्किंग में है।
कांग्रेस भी अब सोशल मीडिया के मामले में पीछे नहीं है। पार्टी ने जहां UP में 1500 लोगों की एक विशेष टीम लगाई है। वहीं पंजाब में 100 लोगों की टीम सोशल मीडिया प्रचार पर जुटी है। यह टीम हर दिन चन्नी और सिद्धू के क्लिप बना बनाकर वायरल कर रही है।
अकाली दल की टीम में 70 से ज्यादा लोग, आउट सोर्सिंग अलग
शिरोमणि अकाली दल ने सोशल मीडिया प्रचार के लिए 70 से ज्यादा सोशल मीडिया स्पेशलिस्टों की टीम लगाई है। टीम में सोशल मीडिया मैनेजर, वीडियो एडिटर, एसईओ एक्सपर्ट हैं जो दूसरी पार्टियों के सोशल मीडिया पर भी नजर रखती है। ये टीम सुखबीर बादल के कार्यक्रमों को फेसबुक, ट्वीटर और यू ट्यूब पर लाइव करती है।



