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लाल लकीर और नया कानून:सर्वे के बाद दर्ज होगा जमीनों का रिकाॅर्ड, सिविल कोर्ट में होगी मालिकाना विवादों की सुनवाई

आबादी देह कानून से 12500 गांवों को फायदा, जिनके पास रजिस्ट्री/इंतकाल नहीं

134 साल पहले बने पंजाब रेवेन्यू एक्ट 1887 में प्रत्येक गांव की रिहायशी आबादी का बफर जोन तय किया गया। इस जोन को लाल लकीर लगाकर चिन्हित किया गया, जिसे आज लाल लकीरी जमीन या आबादी देह कहा जाता है। यहां रहने वालों के पास जमीनों की रजिस्ट्रियां नहीं हैं। पंजाब में पहली बार 2015 में मोगा में इस मामले में जोर पकड़ा।

अब सरकार ने आबादी देह एक्ट 2021 काे मंजूरी दे दी है। कानून के लागू होने के बाद हर जिले में लाल लकीर जमीनों का सर्वे होगा। पंजाब में 12500 गांव हैं। एक अंदाजे में करीब एक लाख हेक्टेयर जमीन का रिकाॅर्ड साधारण इंतकाल में शामिल नहीं है। हालांकि अभी डेट फाइनल नहीं हुई है लेकिन अगले महीने इसे लागू किए जाने की संभावना है। जानिए अब क्या बदलाव होने जा रहे हैं।

आइए जानें- लाल लकीर और बने नए कानून के बारे

Q. क्या हैं लाल लकीरी या आबादी देह जमीनें?
-अंग्रेजों ने जमीनों को आबादी, खेत व प्रशासनिक जायदाद के तौर पर बांटा। गांवों में जहां आबादी होती थी, उसमें शामिल जमीन को लाल लकीर लगाकर घेरे में शामिल कर दिया। खेतीबाड़ी की जमीनों का इंतकाल होता था यानी सरकारी रिकाॅर्ड में उसके मालिक का नाम दर्ज होता था, लेकिन लाल लकीर वाली जमीन में बसे लोगों के नाम व रकबे का रिकाॅर्ड नहीं रखा जाता था।

Q. लोगों ने लाल लकीरी जमीनों का क्या इस्तेमाल किया?
-गांवों में लोगों को लोहार, वैद्य, चौकीदार, सुनार, बुनकरों आदि की जरूरत होती थी। लोग सर्वसम्मति से अपने लाल लकीर वाले बफर जोन में उन्हें कुछ जमीन दे देते थे। इनका मालिकाना हक सरकारी रिकाॅर्ड में दर्ज नहीं होता था। पंचायत ही सबकुछ थी। इसको लेकर विवाद होते रहे थे।

Q. अब दिक्कत क्या है?
-लाल लकीरों वाले कई गांव अब नगर निगमों का हिस्सा हैं। कई जिलों में गांवों में लाल लकीरी बफर जोन में बसे लोगों के‌ बीच मालिकाना हक, बंटवारे के विवाद हैं। कई लोग अपनी जमीन बेचकर हाउसिंग लोन लेना चाहते हैं, लेकिन बैंक कहते हैं कि आपके पास रजिस्ट्री नहीं है। मालिकाना हक जताने का सरकारी रिकाॅर्ड नहीं है।

Q. नया आबादी देह कानून क्या करेगा?
-अफसर तैनात किए जा रहे हैं। इसके नियम कायदे के अनुसार हर जिले मे लाल लकीरी जमीनों का सर्वे होगा। इसमें उन लोगों का रिकाॅर्ड शामिल होगा जो अपने अपने रकबे में काबिज हैं। इस तरह सरकारी सर्वे में लोगों का मालिकाना हक तय हो जाएगा।

Q. सर्वे कहां-कहां होगा?
-पूरे पंजाब में पंचायत, निगम, कौंसिल, परिषद आदि में सर्वे किया जाना है। नगर निगम व पंचायतों की कमेटियां मालिकों-कब्जाकारों के नाम तय करेंगी ताकि किसी तरह का विवाद न रहे।

Q. सर्वे में कौन-सी जमीनें शामिल रहेंगी?
-आबादी देह में सड़कें, रास्ते, गलियां, पार्क, ड्रेन, पब्लिक टाॅयलेट, तालाब, टंकी, कुएं, वाटर बाॅडी, खेल मैदान, बस स्टैंड, वेटिंग एरिया, पब्लिक गैदरिंग के स्थान, खाली प्लाॅट, ग्रामीण जमीन, गांव में ऐसी कोई खाली जमीन, जिसके मालिकाना हक वाला कोई शख्स नहीं हो व जमीन सरकारी है तो भी शामिल रहेंगे।

Q. सर्वे कैसे होगा?
-कानून के तहत नए अफसर तय किए गए हैं, जिनमें सर्वेयर, चीफ रेजोल्यूशन अफसर, कमिश्नर, सहायक रेजोल्यूशन अफसर, फाइनेंशियल कमिश्नर शामिल होंगे। सर्वेयर के पास ग्राउंड वर्क है। रेजोल्यूशन अफसर सारा प्रस्ताव तैयार करेगा, सहायक कमिश्नर प्रबंधन करेगा व कमिश्नर सर्वोच्च अधिकारी होगा। नायब तहसीलदार लेवल के अफसर सहायक रेजोल्यूशन अफसर बनेंगे। डिविजनल कमीशन इस सारे सिस्टम में कमिश्नर के तौर पर प्रभारी होंगे।

Q. अफसरों की पावर क्या रहेगी?
-अफसरों के पास मौके पर जाने, किसी भी जायदाद में संवैधानिक तरीके से प्रवेश करने, अलग-अलग विभागों से रिकाॅर्ड मांगने, किसी पक्ष को बुलाकर पूछताछ करनी है तो समन करने का अधिकार होगा। ये काम वह इंडियन एवीडेंस एक्ट की पावर व इंडियन पोस्टल एक्ट में समन संबंधी प्रोसीडिंग से करेंगे।

Q. आम लोगों को क्या लाभ मिलेगा?
-पहली बार पंजाब सरकार के रिकाॅर्ड में साधारण इंतकाल रिकाॅर्ड के अलावा लाल लकीरी जमीनों में मालिकाना हक वाले लोगों का रिकाॅर्ड होगा। वह इसके बाद अपनी जायदाद आसानी से बेच सकते हैं। मालिकाना हक दिखाकर हाउसिंग लोन ले सकेंगे। बंटवारा कर सकेंगे।

Q. शहरी जनता को क्या लाभ होगा?
-नगर निगम की हदों में शहरी जनता को हाउसिंग लोन लेने को लेकर तो आसानी होगी, लेकिन वह चेंज ऑफ लैंड यूज करवाकर कोई व्यापारिक इमारत बनाना चाहते हैं तो आवेदन कर सकेंगे। नगर निगम इस जमीन का नक्शा पास करेगा। अभी तक जो लोग हाउस टैक्स जमा कराते थे, उसकी रसीदों के जरिये ही अपना कब्जा दिखाते रहते थे।

Q. जो केस इन जमीनों को लेकर चल रहे हैं, उनका क्या होगा?
-किसी लाल लकीरी जमीन को लेकर अदालत में कोई केस चल रहा है तो वह चलता रहेगा। कोई नया विवाद पैदा होता है तो उसकी सुनवाई भी सिविल कोर्ट ही करेगी। जमीन के विवादों की सुनवाई का कोई प्रावधान नए देह आबादी प्रस्तावित कानून में शामिल नहीं है। नए कानून में तो केवल किसी के नाम संपत्ति रिकॉर्ड में दर्ज करने को लेकर लोगों से एतराज की सुनवाई हो सकती है।

Q. अदालती केस कम होंगे?
-लाल लकीरी जमीनों को लेकर मालिकाना हक को लेकर जो लोगों में संघर्ष चल रहे हैं, इनमें कमी आएगी। नए कानून में नगर निगम की कमेटियों व पंचायतों की कमेटियां मालिकाना हक के मामले प्राथमिक स्तर पर ही निपटाने में आधार बनेंगी।

Q. सरकार को क्या लाभ मिलेगा?
-मालिकाना हक मिलने से लोग जमीनों की खरीद-फरोख्त करेंगे। इससे सरकार को टैक्स मिलेगा। नगर निगमों को नक्शा फीस, चेंज ऑफ लैंड यूज, सरकार बैंकोंे को ब्याज का लाभ होगा।

Q. पंजाब की आर्थिकता को क्या लाभ?
-लाल लकीरी जमीनों पर निर्माण कार्य तेज होंगे, जिससे भवन निर्माण से जुड़े समूचे सेक्टर को ग्राहक मिलेंगे।

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