
जालंधर : 9 माह अधिक समय से बंद पड़े पंजाब के टोल प्लाजा चलाने के लिए केन्द्र सरकार ने पंजाब सरकार को कहा है। केन्द्र ने एक पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में किसानों का आंदोलन जस का तस है और किसान टोल प्लाजों पर डटे हुए हैं। केन्द्र ने पंजाब की मुख्य सचिव को पत्र लिखकर टोल प्लाजों से किसानों का कब्जा हटवाने के लिए कहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी ऑल इंडिया के चेयरमैन द्वारा पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन को लिखे पत्र में कहा गया कि किसान आंदोलन के चलते अक्तूबर 2020 से ही टोल प्लाजों पर कार्य बंद है, जिससे खजाने का भारी नुकसान हो रहा है। पत्र अनुसार नुकसान 830 करोड़ रुपए का है जबकि टोल प्लाजा वालों को जो मुआवजा देना पड़ेगा उसकी राशि अलग से होगी।
मंत्रालय ने इस बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री को पहले भी एक पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक हालात में बदलाव नहीं हुए। जनहित में इस मामले को शीघ्र हल किया जाना आवश्यक है। इससे पहले पंजाब में टोल प्लाजा चला रही कंपनियों ने भी पंजाब सरकार से पुलिस सुरक्षा मांगी थी ताकि टोल प्लाजा किसानों से मुक्त करवा के उन्हें चलाया जा सके। कंपनियों ने पंजाब सरकार के साथ एक बैठक करने के बाद अब पत्र लिखकर टोल प्लाजा के आर्थिक नुकसान की सूची पंजाब सरकार को भेजी थी और इस पर शीघ्र कार्रवाई के लिए कहा था लेकिन कंपनियों ने साफ कहा था कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो वे पंजाब में चलने वाली नई परियोजनाओं पर काम नहीं कर सकेंगे। पंजाब में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन 25 टोल प्लाजा हैं। इनमें से कुछ टोल प्लाजा बी.ओ.टी. के भी हैं जो निजी कंपनियों द्वारा संचालित हैं।
ताजा मामले में रोहन राजदीप टोलवे लिमिटेड ने और एटलांटा रोपड़ टोलवे प्राइवेट लिमिटेड ने पंजाब सरकार को पत्र लिखे हैं। रोहन राजदीप टोलवे लिमिटेड के 6 टोल प्लाजा हैं जिनमें बलाचौर-होशियारपुर-दसूहा रोड, पटियाला-समाना-पातड़ां रोड, कीरतपुर साहिब-आनंदपुर साहिब-ऊना रोड, दाखा-बरनाला-रायकोट रोड, मोरिंडा-कुराली-सिसवां रोड और जगराओं-नकोदर रोड हैं। जबकि एटलांटा रोपड़ टोलवे प्राइवेट लिमिटेड की पंजाब की परियोजना में रोपड़-चमकौर साहिब-नीलों दोराहा शामिल है। तीन केन्द्रीय कृषि अधिनियमों के विरोध में अक्तूबर 2020 को किसानों में पंजाब के सभी टोल प्लाजा बंद करवा दिए थे और तभी से तमाम टोल प्लाजों पर किसानों का कब्जा है और सभी वाहन बिना किसी टोल प्लाजा फीस के चल रहे हैं।
पंजाब सरकार के पी.डब्ल्यू.डी. मंत्री और अधिकारियों की एक बैठक भी इसी वर्ष 4 मार्च को हुई थी। इसमें कंपनियों ने अपनी बात रखी थी कि टोल प्लाजा बंद होने से उन्हें प्रतिदिन भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और वे बैंकों से इन मार्गों के निर्माण के लिए ऋण की राशि भी नहीं अदा कर पा रहे। बैठक में ये बात कही गई थी कि पंजाब में किसानों का टोल प्लाजा बंद करवाना सीधे तौर पर राज्य के क्षेत्राधिकार का मामला है। इसलिए सरकार उन्हें मुआवजा दे। पंजाब सरकार ने कंपनियों की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया था।
कंपनियों के लोगों ने केन्द्र सरकार को भी लिखा था कि उनके करोड़ों रुपए इन परियोजनाओं पर लगे हैं और बैंक के कर्जों पर ब्याज-दर-ब्याज लग रहा है। इसके साथ ही पंजाब के हजारों युवा, जो इन टोल प्लाजों पर नौकरियां कर रहे थे उनके लिए भी रोजगार संकट बना हुआ है। उसी को देखते हुए केन्द्र सरकार ने पंजाब को फिर से स्मरण करवाया है।



