
मितरां नूं शौक हथियारां दा… ये लाइन गायक बब्बू मान के गीत के बोल भर नहीं है बल्कि सीमावर्ती प्रदेश पंजाब की एक हकीकत भी है। इस शौक का ही नतीजा है कि सूबे में हर 18वें पंजाबी के पास लाइसेंसी हथियार है। पंजाब पुलिस से भी ज्यादा हथियार सूबे के लोगों के पास है और अवैध हथियारों की कोई गिनती ही नहीं है। चुनाव के मद्देनजर जमा हुए हथियारों के सरकारी आंकड़ों से इस बात की पुष्टि भी हो रही है।
पंजाब के लोगों को महंगी गाड़ी और हथियार रखने का बड़ा चस्का है। ये दोनों ही शौक पंजाबियों के सिर पर चढ़कर बोलते हैं। हथियार भी कोई ऐसे-वैसे नहीं बल्कि महंगे, ऑटोमैटिक और अत्याधुनिक, जो ज्यादा मार करने वाले हैं।
चिट्टा और कट्टा, दो ही बरामदगी ज्यादा
विभागीय आंकड़ों की बात करें तो राज्य में लोगों के पास 3,90,275 लाइसेंसी हथियार हैं। सूबे में आबादी के हिसाब से यह आंकड़ा सामने आता है कि तकरीबन हर 18वें पंजाबी के पास हथियार है। ये हथियार रजिस्टर्ड और वैध हैं। वहीं सीमावर्ती राज्य होने के कारण अवैध हथियारों की खेप आए दिन पुलिस या बीएसएफ की टीम पकड़ती रहती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सूबे में जो भी अराजक तत्त्व पकड़े जाते हैं तो उनमें से 80 से 90 फीसदी के पास दो ही चीजें मुख्य रूप से पकड़ी जाती हैं। पहला कट्टा या पिस्तौल और दूसरा चिट्टा या हेरोइन। पंजाब में चुनावों के मद्देनजर सख्ती के बीच भी अब तक 65 अवैध हथियार पकड़े जा चुके हैं।
82 हजार पुलिसकर्मियों के पास 1.25 लाख हथियार
एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब पुलिस में करीब 82 हजार अधिकारी और कर्मचारी हैं। इनके पास 1.25 लाख के करीब ही हथियार हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस तरह के विदेशी अत्याधुनिक पूरी तरह से ऑटोमैटिक हथियार लोगों के पास हैं, ऐसे हथियार पुलिस के पास भी नहीं हैं। पुलिस के पास इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने पिस्टल हैं। लोगों के पास बुल्गारिया में बने पिस्टल और यूएसए मेड मैगनम जैसे पिस्टल हैं, जो स्टील की चादर को भी भेदने की ताकत रखते हैं।
युवाओं में छोटे हथियारों का ज्यादा क्रेज
पंजाब में एक समय दोनाली बंदूक रखने का शौक बहुत ज्यादा चलन था। अब आधुनिकता के दौर में युवा भी आधुनिक हथियारों की तरफ ज्यादा आकर्षित हैं। यही कारण है कि राइफलों का ट्रेंड खत्म हो रहा है। नई पीढ़ी को चलानी बेशक न आए लेकिन दिखावे के लिए वह दोनाली बंदूकों की बजाय छोटे हथियारों की ओर ज्यादा खिंच रही है। इंडियन मेड की बजाय पंजाबी विदेशी हथियारों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। हथियारों में भी महंगी पिस्टल पंजाबियों की पहली पसंद बन रही है। युवा पीढ़ी में हथियारों के क्रेज के कारण ही पंजाब में हर साल लाइसेंसी हथियार धारकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
यूपी के बाद हथियारों में देश में दूसरे नंबर पर
हथियार रखने के मामले में उत्तर प्रदेश देशभर में पहले नंबर पर है। यूपी में लाइसेंसी हथियार धारकों की संख्या करीब 12 लाख है। इसके बाद 3,90,275 लाइसेंसी हथियार धारकों के साथ पंजाब दूसरे नंबर पर है। तीसरा नंबर मध्यप्रदेश का है, वहां करीब 2.75 लाख लाइसेंसी हथियार हैं। यदि अवैध हथियार रखने की बात की जाए तो इसमें पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश, दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश, तीसरे पर बिहार और चौथा नंबर पर पंजाब का आता है।
चुनाव के दौरान 3.76 लाख हथियार जमा
पंजाब में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे हालात में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होते ही किसी को भी हथियार लेकर चलने पर ही नहीं बल्कि घर पर रखने की भी मनाही है। चुनाव आयोग की हिदायतों के अनुसार कोड ऑफ कंडक्ट लगने के बाद सिर्फ वही लोग अपने पास हथियार रख सकते हैं जिन्हें बहुत ही ज्यादा खतरा है। या फिर सुरक्षा बल ड्यूटी के दौरान हथियार रख सकते हैं। शेष सभी को अपने लाइसेंसी हथियार नजदीकी पुलिस थानों, चौकियों या फिर हथियार बेचने वाली दुकानों पर जमा करवाने पड़ते हैं। पंजाब में अभी तक 3,90,275 लाइसेंसी हथियारों में से 3,76,451 हथियार जमा हो चुके हैं।




