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पंजाब में मुफ्त बस सेवा बनी महिलाओं के लिए मुसीबत, आधार कार्ड कहकर बुला रहे रोडवेज कंडक्टर

सरकारी बसों के मुलाजिम अब महिला यात्रियों को बसों में सवार कराने को लेकर भी आनाकानी कर रहे हैं। गंतव्य की तरफ जा रही बस के रास्ते में अगर कोई महिला यात्री किसी छोटे स्टेशन पर उतरने के लिए कहती है तो बस को रोका तक नहीं जा रहा।

पंजाब रोडवेज, पनबस एवं पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) मुलाजिम अभद्रता की तमाम सीमाओं को लांघते हुए सरकारी बसों में नि:शुल्क यात्रा करने वाली महिलाओं को ‘आधार कार्ड’ के नाम से बुलाने लगे हैं। सार्वजनिक तौर पर कंडक्टर ऊंची आवाज में महिला यात्रियों को आधार कार्ड बोलकर बस से नीचे पर जाने को भी कहते हैं। यहीं बस नहीं है। सरकारी बसों के मुलाजिम अब महिला यात्रियों को बसों में सवार कराने को लेकर भी आनाकानी कर रहे हैं। गंतव्य की तरफ जा रही बस के रास्ते में अगर कोई महिला यात्री किसी छोटे स्टेशन पर उतरने के लिए कहती है तो बस को रोका तक नहीं जा रहा।

पंजाब सरकार की तरफ से 1 अप्रैल 2021 से राज्य की महिलाओं के लिए पंजाब क्षेत्र में पंजाब की सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। निशुल्क यात्रा सुविधा का लाभ लेने के लिए संबंधित महिला यात्री को आधार कार्ड अथवा अन्य सरकारी पहचान पत्र दिखाना पड़ता है। संबंधित बस कंडक्टर को उक्त पहचान पत्र की एंट्री अपने रिकॉर्ड में करनी पड़ती है, जिसे वह बोझ मानने लगे हैं। यही वजह है कि सरकारी बसों के मुलायम महिला यात्रियों के साथ सार्वजनिक तौर पर अभद्रता करनी तक पर उतर आए हैं।

जालंधर के शहीद ए आजम भगत सिंह इंटर स्टेट बस टर्मिनल पर मोगा की रहने वाली दिलप्रीत ने कहा कि पंजाब की महिलाओं ने तो कभी भी बसों में नि:शुल्क यात्रा की मांग ही नहीं की थी। पंजाब सरकार ने खुद यह सुविधा दी है, लेकिन इस सुविधा के नाम पर पंजाब सरकार के मुलाजिम सार्वजनिक तौर पर महिलाओं से अभद्रता कर रहे हैं। यह एक उत्पीड़न है। हैरानी इस बात की है कि पंजाब सरकार के परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों को इस बात की पूरी जानकारी है कि बसों में महिलाओं से अभद्रता की जा रही है बावजूद इसके स्टाफ के ऊपर कोई सख्ती नहीं की जा रही है।

शाहकोट से जालंधर में आईलेट्स की कोचिंग लेने के लिए आने वाली मधुबाला ने कहा कि यह मात्र महिला यात्री समझ सकती हैं कि बसों में उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है। मधुबाला ने कहा कि पहले तो छोटे स्टेशनों पर बसों का इंतजार कर रही महिलाओं को बस में सवार नहीं कराया जाता। इसी तरह से वापसी पर उतारा भी नहीं जाता रास्ते में कंडक्टर उल्टे सीधे शब्द बोलते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी बसों में महिलाओं के साथ हो रहे ऐसे व्यवहार का संज्ञान महिला आयोग को लेना चाहिए। मधुबाला ने कहा कि अगर पंजाब सरकार को महिलाओं के साथ बसों में ऐसी अभद्रता करवानी है तो नि:शुल्क यात्रा सुविधा ही बंद कर देनी चाहिए।

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