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Punjab Election 2022: जालंधर उत्तर में विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस में 35 वर्ष बाद रोचक मुकाबला

जालंधर नार्थ हलके की विधानसभा सीट पर पिछले चुनावों में हमेशा भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही है। कभी भाजपा ने कांग्रेस को तो कभी कांग्रेस ने भाजपा को पटकनी दी है। इस बार चुनावी मैदान में कांग्रेस और भाजपा के अलावा अकाली दल, आप व आजाद उम्मीदवार भी मैदान में खड़े है। इस कारण चुनावी समीकरण रोचक होने की उम्मीद है।

इस सीट से वर्ष 1985 के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार वेद ओम प्रकाश दत्त ने 1351 वोट से जीत दर्ज की थी। इस बार के विधानसभा चुनावों में 35 वर्ष बाद भाजपा व कांग्रेस में टक्कर देखने को मिलेगी। वर्ष 1992 में कांग्रेस उम्मीदवार ने भाजपा के उम्मीदवार को पटकनी देते हुए 23,094 वोटों से जीत दर्ज की थी। पिछले सात चुनावों की बात करें तो कांग्रेस के खाते में नार्थ सीट चार बार व भाजपा के खाते में तीन बार गई है।

विधानसभा 2022 के चुनाव में भाजपा से केडी भंडारी तो कांग्रेस से बावा हैनरी के बीच कांटे की टक्कर की संभावना है। इस चुनाव में कम मार्जिन में उम्मीदवार की जीत की उम्मीद जताई जा रही है। मार्जिन कम होने का कारण मैदान में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दिनेश ढल्ल, आजाद उम्मीदवार देसराज जस्सल व अकाली दल से कुलदीप सिंह लुभाना भी है। हालांकि जीत किस उम्मीदवार की होगी, यह तो आने वाला समय बताएगा। कांग्रेस के खाते में सीट जाती है तो पांचवी बार जीत दर्ज होगी। भाजपा के खाते सीट आती है तो चार-चार की बराबरी हो जाएगी।

2007 व 2012 में भंडारी ने हैनरी को दी थी टक्कर

भाजपा के केडी भंडारी ने वर्ष 2007 व 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट को कांग्रेस के उम्मीदवार अवतार हैनरी से छीनकर भाजपा की झोली में डाला था। भंडारी ने लगातार दो बार जीतकर दबदबा कायम कर रखा था। वर्ष 2012 चुनाव में अवतार हैनरी ने कड़ी टक्कर दी थी। केडी भंडारी बड़ी मुश्किल से दूसरी बात जीत पाए थे। इसके बाद 2017 में अवतार हैनरी ने भंडारी के खिलाफ बेटे को बावा हैनरी को उतारा जो विजयी रहे।

2017 में बावा हैनरी ने केडी भंडारी को जीत की हैट्रिक बनाने से रोका था

वर्ष 2007 व वर्ष 2012 में केडी भंडारी दो बार जीत चुके थे। वर्ष 2017 में अवतार हैनरी के बेटे अवतार हैनरी जूनियर (बावा हैनरी) मैदान में उतरे थे। बावा हैनरी ने भंडारी को 32,291 की वोट से जीत दर्ज कर सीट को कांग्रेस की झोली में डाल दिया। वर्णनीय है कि इस हल्के ने उसी लीडर को पटखनी दी है जो खुद को कद्दावर समझने लगता है। 

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