
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को पंजाब दौरे के दौरान डेरा राधा स्वामी ब्यास पहुंचे। उन्होंने राधा स्वामी सत्संग के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने डेरा मुखी के साथ अपनी तस्वीर साथ साझा करते हुए यह जानकारी दी।
अमित शाह ने कहा कि आज राधा स्वामी ने डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से सत्संग ब्यास में मुलाकात हुई। राधा स्वामी सत्संग ब्यास लगातार कई दशकों से समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाकर मानवता और समाज सेवा के लिए कार्य कर रहा है। यह अपने आप में अद्भुत और प्रेरणादायी है। शाह बुधवार को भारतीय जनता पार्टी, पंजाब लोक कांग्रेस और अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी रैली को संबोधित करने फिरोजपुर पहुंचे। फिरोजपुर में रैली को संबोधित करने के बाद अमित शाह डेरा ब्यास पहुंचे।
रविवार को पीएम मोदी मिले थे डेरा ब्यास मुखी से
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में पंजाब के ब्यास स्थित राधा स्वामी सत्संग डेरा के मुखी बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की थी। मोदी की डेरा ब्यास के प्रमुख से यह मुलाकात उनकी पंजाब चुनाव में पहली फिजिकल रैली से एक दिन पहले हुई थी। राजनीतिक गलियारों में इन मुलाकातों को पंजाब चुनाव के सिलसिले में देखा जा रहा है। हालांकि डेरा राधा स्वामी ने कभी भी अपने भक्तों से किसी विशेष पार्टी को वोट देने की अपील नहीं की।
पंजाब में डेरा ब्यास का मजबूत आधार
पंजाब में राधा स्वामी डेरे का मजबूत आधार है। पंजाब के अलावा दूसरे कई राज्यों में भी डेरे के अनुयायी हैं। डेरा ब्यास के अनुयायी कई सीटों पर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं।
डेरे का राजनीतिक विंग मजबूत
बाबा जैमल सिंह ने 1891 में डेरा ब्यास की स्थापना की थी। डेरा जमीनी स्तर पर जुड़ा है और अभी तक सियासत से दूर रहा है। हालांकि, डेरे का राजनीतिक विंग मजबूत है। खुलेतौर पर कभी राजनीति की बात नहीं होती और न घोषणाएं होती हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान मोहिंदर सिंह केपी भी डेरा ब्यास के अनुयायी हैं। चरणजीत सिंह चन्नी भी मुख्यमंत्री बनने के बाद दो बार डेरा ब्यास जा चुके हैं। अकाली नेता बिक्रम मजीठिया भी वहां आते-जाते रहते हैं।
117 में से 94 सीटों पर डेरों का प्रभाव
पंजाब में सक्रिय डेरों को लेकर कोई सरकारी आंकड़े नहीं हैं, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक पंजाब में 9,000 सिख और 12,000 गैर सिख डेरे हैं। इनमें से तकरीबन 300 डेरे प्रमुख हैं जिनका पंजाब के साथ हरियाणा में भी असर है। इनमें से भी 12 डेरे ऐसे हैं जिनके एक लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। डेरा ब्यास इन्हीं में से एक है।