
गुरु यानी बृहस्पति कुंभ राशि में 19 फरवरी को अस्त होंगे और कुंभ राशि में ही 20 मार्च को उदय होंगे। इसके प्रभाव से तुला, कुंभ सहित आठ राशियों को बिजनेस में लाभ और करियर में तरक्की के योग बनेंगे। शिव मंदिर ताजपुर पंडित ओम प्रकाश के अनुसार गुरु एक राशि में लगभग 13 माह तक गोचर करते हैं।
देवगुरु बृहस्पति लगभग 12 वर्षों में सभी बारह राशियों का भ्रमण पूर्ण करते हैं। यानी इस साल गुरु जिस राशि में है, उस राशि में लौटने पर अब करीब 12 वर्षों का समय लगेगा। कुंभ राशि प्रवेश के साथ ही शनि गुरु का युति संबंध भंग हो चुका है। राशि परिवर्तन कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के लिए अशुभ फल देने वाला रहेगा।
लाभ – तुला, कुंभ सहित 8 राशियों को मिलेगा शुभ फल
गुरु ग्रह का यह परिवर्तन मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि के लिए शुभ रहने वाला है। इन राशियों के जातकों को गुरु के प्रभाव से अधिकांश कार्यों में सफलता, बिजनेस में लाभ, करियर में तरक्की के योग बनेंगे। इस साल इन राशियों पर गुरु की कृपा से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी प्राप्त रहेगा।
बन सकती हैं अकाल की स्थिति, सत्तारूढ़ दलों की बढ़ सकती हैं परेशानिया
पं. ओम प्रकाश शर्मा व ज्योतिषाचार्या राकेश गुप्ता बताया कि गुरु का राशि परिवर्तन सभी राशियों के जातकों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। गुरु धर्म, अध्यात्म का प्रमुख ग्रह है। गुरु के कुंभ राशि में प्रवेश से रोगों का प्रभाव कम होगा। राजनेताओं में वैमनस्यता का भाव बढ़ सकता है। कहीं-कहीं अकाल की स्थितियां भी निर्मित हो सकती है। गुरु शनि की नीच राशि मकर से शनि की ही राशि कुंभ में प्रवेश कर रहे हैं। सत्तारूढ़ सरकारों की परेशानी हो सकती है।
3 राशियों में गुरु नीच उनमें नुकसान संभव, कुंभ को मिश्रित फल
वहीं, गुरु की यह चाल तीन राशियों कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के लिए अशुभ फल देने वाली रहेगी। जिन राशियों में गुरु नीच के हैं उन्हें विवाद, दुश्मनी और व्यापार में घाटा हो सकता है। इसके अलावा कर्क राशि के लिए गुरु का कुंभ राशि में होना मिश्रित फल देने वाला रहेगा। यानी इस राशि के जातकों चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी से ही कोई कदम बढ़ाना होगा।