
आज NSDR की बात करते हैं। हां, वही NSDR जिसकी बात Google के CEO सुंदर पिचाई ने की थी। अब आप कहेंगे कि यह क्या है? आपकी तरह ही मैं भी यह सोच रही थी। गूगल किया तो इसका फुल फॉर्म non-sleep deep rest पता चला।
थोड़ा और सर्च किया तो पता चला कि यह योग निद्रा जैसा ही है। यह एक आध्यात्मिक नींद है, जिसमें जागते हुए सोने की प्रैक्टिस करनी पड़ती है। सोने और जागने के बीच की स्थिति को ही योग निद्रा कहते है। वही जो हमारे ऋषि मुनि किया करते थे।
आपको पता है धनुर्धारी अर्जुन को सोने की जरूरत महसूस नहीं होती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि योग निद्रा की प्रैक्टिस कर उन्होंने नींद पर जीत हासिल कर ली थी। इसलिए उन्हें गुडाकेश कहा जाता था। रामायण काल में वनवास के दौरान लक्ष्मण ने भी की थी इसकी प्रैक्टिस।
अगर 10 से 30 मिनट तक योग निद्रा की सही तरीके से प्रैक्टिस करें तो 7 से 8 घंटे की गहरी नींद 4 घंटे में भी पूरी कर सकते हैं।
अब वापस पिचाई की बात पर आते हैं…
सुंदर पिचाई ने क्या कहा?
- पिचाई ने वॉल स्ट्रीट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वे अपने काम का तनाव कम करने के लिए NSDR यानी non-sleep deep rest का सहारा लेते हैं। इसके बारे में उन्हें एक पॉडकास्ट के माध्यम से पता चला।
- इसमें आप बिना सोए खुद को दोबारा नई एनर्जी के साथ काम के लायक खुद को तैयार कर लेते हैं।
- जब भी उन्हें मेडिटेशन करना मुश्किल लगता है, तब वे YouTube पर जा कर एक NSDR का वीडियो ढूंढ़ लेते हैं। 10, 20 या 30 मिनट के इन वीडियो से स्ट्रेस फ्री हो जाते हैं।
- उनकी तरह आज कई ऐसे प्रोफेशनल हैं जो 8 घंटे की नींद पूरी नहीं कर पाते हैं। कई ऐसे हैं जो काम की शिफ्ट बदलने की वजह से नींद के घंटे पूरे नहीं कर पाते। यंगस्टर्स नेटफ्लिक्स पर सीरीज देखने के चक्कर में भी देर रात तक जागते हैं। कुछ तो कुछ नहीं करते बस बिस्तर पर लेटकर मोबाइल पर रातभर रील्स देखते रहते हैं।
- हम देर तक जागने की सलाह नहीं दे रहे हैं। बस इतना बता रहे हैं कि ऐसे लोगों को योग निद्रा या NSDR की प्रैक्टिस करनी चाहिए।
क्या होता है NSDR?
- Non-sleep deep rest (NSDR) शब्द से स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉक्टर एंड्रयू ह्यूबरमैन ने दुनिया को परिचित करवाया। NSDR में हमें अपनी आंखें बंद करके 20-30 मिनट लेटना होता है और वापस उठने के बाद हम इतना रिलैक्स महसूस करते हैं जैसे कि 7-8 घंटे की गहरी नींद से उठे हों।
- स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर काम करने वाले डॉक्टर एंड्रयू ह्यूबरमैन बताते हैं कि वे स्वयं 10 सालों से NSDR प्रैक्टिस कर रहे हैं और वे इसे अपनी नींद पूरी करने और फोकस्ड रहने का बेस्ट टूल मानते हैं।
- NSDR शब्द दुनिया के लिए नया हो, पर यह प्रक्रिया हमारे देश के लिए हजारों साल पुरानी है। इसकी बात हमारे धर्मग्रंथों में भी की गई है। वहीं, पतंजलि के योग सूत्र में भी इसका जिक्र है।
NSDR के पीछे योग निद्रा वाला साइंस
दिमाग में मौजूद न्यूरोन विभिन्न तरंगें उत्पन्न करते हैं। इनमें से अल्फा तरंगें हमें खुश रखने का काम करती है। जिस दिन हम तनाव में होते हैं उस दिन दिमाग में अल्फा तरंगों की एक्टिविटी कम हो जाती है। योग निद्रा और मेडिटेशन से दिमाग में अल्फा वेव की एक्टिविटी बढ़ जाती है। हम खुशी महसूस करते हैं।
NSDR के पीछे भी यही योग निद्रा वाला साइंस है। जैसे-जैसे दिमाग आराम की अवस्था में जाने लगता है वैसे-वैसे आपके हृदय की गति धीमी होती चली जाती है। दिमाग बीटा तरंगों से अल्फा तरंगों की ओर स्विच कर जाता है। बीटा तरंगें एक्टिव दिमाग से जुड़ी होती हैं जबकि शांत अवस्था में अल्फा तरंगें अधिक एक्टिव रहती हैं। इसके बाद आप रिलैक्स हो जाते हैं।
योग निद्रा बेहतर रूप से सोने में भी सहायक है। कई अध्ययन बताते हैं कि जो लोग नियमित रूप से योग व ध्यान करते हैं उनकी नींद अन्य लोगों से कहीं ज्यादा बेहतर और गहरी होती है।
भारत की देन है योग निद्रा: ऋग्वेद में उत्पत्ति का जिक्र
- स्टेप-1: शांत और कम रोशनी वाली जगह पर पीठ के बल लेट जाएं। शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। हथेलियां खोलकर आसमान की तरफ रखें।
- स्टेप-2: गहरी सांस लें, फिर सामान्य सांस लेते हुए ध्यान दाहिने पैर के पंजे पर ध्यान लगाएं। इस दौरान मन में बेतरतीब ख्याल न लाने की कोशिश करें।
- स्टेप-3: अपना ध्यान पंजे से घुटने, फिर जांघ पर लाएं। इस प्रक्रिया को बाएं पैर के साथ दोहराएं। ऐसे करते-करते गले, छाती आदि पर ध्यान लगाएं।
- स्टेप-4: गहरी सांस लें और कुछ देर इसी स्थिति में लेटे रहें। अब ध्यान आसपास के माहौल पर ले जाएं। दाहिनी करवट लेकर बाएं नाक से सांस छोड़ें।
- स्टेप-5: ऐसा करने से शारीरिक तापमान गिरेगा। थोड़ी देर बाद धीरे से उठकर बैठ जाएं। धीरे-धीरे ही अपनी आंखें खोलें।
75 प्रतिशत बीमार होने का कारण स्ट्रेस होता है
रिसर्च बताते हैं कि हमारे बीमार होने के 75 प्रतिशत कारण स्ट्रेस रिलेटेड होते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर की इंफलेमेटरी प्रोसेस प्रभावित होती है। जिससे अल्जाइमर, एलर्जी, आर्थराइटिस और पेट से रिलेटेड बीमारी होती हैं।
योगनिद्रा हमारे तनाव के चक्र को तोड़कर स्ट्रेस फ्री होने और स्वस्थ रहने में मदद करती है। दिमाग के शांत होने पर शरीर में शुगर लेवल नियंत्रित रहता है जिससे डायबिटीज में राहत मिलती है।
सेहत के लिए फायदेमंद है योगनिद्रा
- तनाव, चिंता और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करती हैं और शरीर को रिलैक्स करता है।
- जिन्हें नींद कम आने या नहीं आने की परेशानी हैं, उन्हें बेहतर नींद पाने में मदद करेगा।
- मन को शांत करता है। एकाग्रता की क्षमता बढ़ती है। दिमागी थकान दूर होती है।
- शरीर के दर्द से छुटकारा दिलाता है। थकान और निगेटिव सोच को दूर करता है।