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गैंगस्टरो को स्टूडैंड यूनियन के नाम पर शैल्टर देना बंद करे राजनितिज्ञ नेता -प्रतिष्ठित कालेजों के नाम की प्रधानगी पाने वालो का कालेजो से नही है कोई नाता…

जालंधर : राज्य भर में गैंगस्टरो की बढ़ रही गिनती व गुडांगर्दी को बढ़ाने में कुछ ऐसे दवंग राजनितिज्ञ नेता भी शामिल है जो युवाओ का शैल्टर बनकर उनको सही मार्ग दीखाने की जगह उनका होंसला बढ़ाते है।


लीडरनुमा युवा कुछ रईसजादों को आसामी बना उनको कैश करते है व कालेज संगठनो के नाम पर अठवी दसवीं फेल व अनपढ़ युवाओं को इंजिनियरिग व मैडीकल कालेजों सहित देश के प्रतीष्ठित डीएवी शैक्षणिक संस्था की प्रधानगी सौंप देते है व फिर शक्ती प्रदर्शन करते हुए दवंग राजिनितिज्ञ नेता का शैल्टर प्राप्त करते है। हैरानीजनक तथ्य यह है कि दवंग राजनितिज्ञ भी ऐसी यूनियनो की जांच करने की जगह बिन सोचे समझे उनको अपने वोटबैंक के लिए आशीर्वाद देने लग जाते है व यह भी नही पूछते कि छात्र सगंठन के नाम प्रधानगी पाने बाला छात्र संबधित कालेज से भी है या नही।
ऐसे छात्र संगठन बनने के बाद रोजाना डीएवी फलाई ओवर के नीचे बने रेलवे हाल्ट की रेलवे लाईनो पर इनके जमघट लगते है व गुटबाजी के चलते विभिन्न तरह के हथियार लहराते हुए मारपीट आम देखी जा सकती है । परस्पर लड़ाई झगड़े के बाद पुलिस प्रशासन भी दवंग नेता के शैल्टर कारण इन पर कार्रवाई करने से परहेज करता है। ऐसी यूनियनो से डीएवी की मैडीकल व इंजिनियरिंग संस्थाओ सहित सीटी व खालसा कालेज तक की मैनेजमैंट को परेशानी का सामना करना पड़ता है व उनका कहना है कि इन बेनामी स्टूडैंट यूनियनो के निर्माण में उनका कोई समर्थन नही है न ही उनको कोई जानकारी है कि उनके कालेजों के नाम पर गैर संगठन अपने संगठन कायम कर रहे है व कोन इनका संचालन करता है ?
राजनितिज्ञो को चाहिए कि वह ऐसे संगठनो को शैल्टर देने से पहले पूर्ण जांच करे व उनके कालेजों के पहचान पत्र चैक करें व फिर उन संस्थाओ की मैनेजमैंट से जानकारी प्राप्त करें कि क्या आपके द्वारा ऐसे संगठनों को मान्यता दी गई है।

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